विधानसभा में उठा गांवों के बंदोबस्त का मुद्दा, प्रदेश के 375 राजस्व गांवों में अब तक शुरू नहीं हुआ सर्वेक्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के राजस्व गांवों के सर्वेक्षण और बंदोबस्त का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने राज्य में लंबे समय से लंबित बंदोबस्त प्रक्रिया को लेकर सरकार से जवाब मांगा। इसके उत्तर में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि प्रदेश के कुल 20,551 राजस्व गांवों में से 746 गांव अभी भी असर्वेक्षित हैं। इनमें 371 गांवों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है, जबकि 375 गांव ऐसे हैं जहां अब तक सर्वेक्षण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक जनक ध्रुव ने सरकार से पूछा कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के अनुसार किसी भी गांव का बंदोबस्त कितने वर्षों में किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राज्य गठन के बाद से अब तक किन-किन गांवों का बंदोबस्त नहीं हुआ है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और शेष गांवों का सर्वेक्षण कब तक पूरा किया जाएगा।

जवाब में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार सामान्यतः प्रत्येक 30 वर्ष में गांवों का सर्वेक्षण एवं भू-राजस्व का निर्धारण किया जाना होता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य के अधिकांश गांवों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ गांवों में यह प्रक्रिया अभी शेष है।

मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि 746 असर्वेक्षित गांवों में से 371 गांवों में सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है, जबकि 375 गांवों में सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण कार्य एक चरणबद्ध प्रक्रिया है, जिसे स्वीकृत योजनाओं, वित्तीय संसाधनों, तकनीकी व्यवस्था और उपलब्ध मानव संसाधनों के आधार पर संचालित किया जाता है।

राजस्व मंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए किसी एक अधिकारी या विभाग को सर्वेक्षण में देरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि शेष गांवों में सर्वेक्षण कार्य कब तक पूरा होगा, इसकी निश्चित समय-सीमा फिलहाल तय करना संभव नहीं है, क्योंकि यह उपलब्ध संसाधनों और प्रशासनिक स्वीकृतियों पर निर्भर करता है।

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