0 कावड़गांव- आमाबाल सड़क पर 3 माह में आ गईं अनगिनत दरारें
(अर्जुन झा) जगदलपुर। इश्क, मुश्क (हथकड़ी) और पाप छुपाए नहीं छुपते, एक न एक दिन इनका भांडा फूट ही जाता है। कुछ ऐसा ही भ्रष्टाचार के मामलों में भी होता है। भ्रष्टाचार की बुनियाद पर तैयार की गई इमारतें और सड़कें देर सबेरे निर्माण कर्ताओं का काला चिट्ठा खुद खोल देती हैं। बस्तर जिले की एक नई नवली सड़क ने तो महज तीन माह में ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की पोल खोल कर रख दी है। इस सड़क पर दरारें ही दरारें नजर आ रही हैं। कुछ जगहों पर तो यह सड़क धसक भी चुकी है।
बस्तर जिले के कावड़गांव और बड़े आमाबाल को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण की गुणवत्ता पर ग्रामीणों और खुद इस सड़क ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए गया है। निर्माण के महज करीब तीन महीने बाद ही कावड़ गांव के राजा मुंडा के पास बने दामड़ी सड़क पर जगह-जगह दरारें पड़ने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों में यह स्थिति सामने आ रही है, तो आने वाले समय में सड़क की हालत और खराब हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क निर्माण में गुणवत्ता के मानकों का कितना पालन किया गया और निर्माण के महज तीन महीने बाद ही सड़क पर दरारें क्यों पड़ने लगी हैं?
सीधी सी बात है – निर्माण से पहले जमीन पर गिट्टी, बोल्डर का भराव नहीं किया गया। केवल मिट्टी और आसपास के पत्थरों को डालकर उसे बिना ढंग से दबाए उस पर पक्की सड़क बना दी गई। नतीजतन यह सड़क हल्के वाहनों का भी भार सह न सकी और दरक गई। सड़क पर कई जगह लंबी चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और कुछ स्थानों पर यह सड़क धंस भी चुकी है। सड़क के दर चुके स्थानों पर विभाग के इंजीनियर बजरी डालकर अपने भ्रष्टाचार के पाप को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं, मगर पाप अब सिर चढ़ कर बोल रहा है।