दक्षिण बस्तर में करप्शन का अनूठा कांक्रिट मॉडल…

0  बचेली-किरंदुल मार्ग के चौड़ीकरण कार्य में धांधली जारी 
0 अधिकारी का बेतुका तर्क-“मौखिक आदेश पर चल रहा काम 
बचेली। लोक निर्माण विभाग के बचेली-किरंदुल मार्ग पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण में भ्रष्टाचार का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हमारे द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद भी न तो ठेकेदार के हौसले पस्त हुए और न ही प्रशासनिक अधिकारियों की नींद खुली। विभागीय शह पर ठेकेदार ने नियमों को धता बताते हुए लगभग 1 किलोमीटर लंबी कांक्रीट ढलाई का काम लीपापोती कर पूरा कर दिया है, और यह सब गुणवत्ता में बिना कोई सुधार किए किया गया। वहीं अधिकारी का गैरजिम्मेदाराना बयान आया कि मौखिक चर्चा पर काम हो रहा है।
जब इस गंभीर भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी पर संबंधित विभागीय अधिकारी से सीधी बात की गई, तो उनका जवाब तंत्र की लाचारी और मिलीभगत को साफ बयां करता है। अधिकारी का कहना है- वर्क ऑर्डर में इस विशिष्ट कार्य का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, इसे उच्च अधिकारियों के साथ मौखिक चर्चा के आधार पर कराया जा रहा है।सरकारी ढर्रे में अधिकारी का यह ‘मौखिक तर्क’ पूरी तरह से गले से नीचे नहीं उतरता। जब इस संबंध में विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा-“शासकीय कार्य कभी भी ‘मौखिक’ नहीं होते। शासन का हर काम लिखित प्रक्रिया और स्वीकृत वर्क ऑर्डर के तहत ही होता है। ठेकेदार को लिखित में निर्देश दिए गए हैं।” उच्चाधिकारियों के इस बयान ने निचले अमले और ठेकेदार के बीच की गहरी साठगांठ को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि यदि उच्चाधिकारी लिखित काम का दावा कर रहे हैं, तो मौके पर मौजूद अधिकारी ठेकेदार को ‘मौखिक आदेश’ का बहाना बनाकर घटिया निर्माण की खुली छूट क्यों दे रहे हैं?

जनता के पैसे की खुली डकैती
यह पूरा मामला स्पष्ट करता है कि ठेकेदार पर विभागीय अधिकारियों का कोई प्रशासनिक जोर या पकड़ नहीं है। जिस तंत्र पर शासकीय राशि की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वही तंत्र इस भ्रष्टाचार में संलिप्त नजर आ रहा है। 1 किलोमीटर तक घटिया कांक्रीट और रॉड की चोरी करके ढांचा तैयार कर दिया गया, लेकिन अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। यह सीधे तौर पर दक्षिण बस्तर में विकास के नाम पर आ रही शासन की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग है।

कब जागेगा जिला प्रशासन?
जब उच्चाधिकारी लिखित आदेश की बात कह रहे हैं, तो क्या मौखिक आदेश का ढोंग रचने वाले अधिकारी और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज होगी? 1 किमी घटिया कंक्रीट का क्या? क्या इस 1 किलोमीटर तक किए गए स्तरहीन कंक्रीट निर्माण को ध्वस्त कर ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाई जाएगी? कौन भरेगा शासकीय खजाने का नुकसान? बिना मानकों के तैयार की जा रही यह सड़क कुछ ही महीनों में टूट जाएगी, तब इसका जिम्मेदार कौन होगा? अब देखना यह होगा कि दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग का शीर्ष नेतृत्व इस संगठित फर्जीवाड़े पर कड़ा रुख अपनाते हुए ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करता है या दक्षिण बस्तर में भ्रष्टाचार का यह ‘कांक्रीट मॉडल’ यूं ही फलता-फूलता रहेगा।

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