0 विस्फोट से पहाड़ में कराई जा रही ब्लास्टिंग
0 रॉयल्टी में सरकार को लगाई लाखों की चपत अफसर की जेब गर्म
(अर्जुन झा)जगदलपुर। पहले बस्तर के जंगलों और पहाड़ों पर नक्सलियों द्वारा किए जाने वाले बारूदी धमाकों की गूंज सुनाई देती थी, अब खनिज और जंगल माफिया बारूदी धमाकों से शांत जंगलों को दहला रहे हैं, पहाड़ों का सीना चीर कर अवैध पत्थर खदान और क्रशर प्लांट चला रहे हैं। यह काला खेल कुछ अफसरों के संरक्षण में चल रहा है।
खनिज माफिया बस्तर संभाग के सुकमा जिले के तुमलपाड़ इलाके के पहाड़ का आधा हिस्सा गायब कर सैंकड़ों ट्रक गिट्टी का अवैध परिवहन कर चुके हैं। सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी राशि का लाखों का चपत लगाकर अफसर अपनी जेब गर्म कर ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं। चर्चा है कि ठेकेदार से सांठगांठ कर बिना अनुमति के ब्लास्टिंग कर पहाड़ का आधा हिस्सा गायब कर दिया गया है। ब्लास्टिंग में कितनी मात्रा में विस्फोटक का उपयोग हुआ इसकी भी जानकारी संबंधित थाने को भी नहीं है। नक्सल प्रभावित इलाके में प्रशासन की अनुमति के बगैर बारूद का उपयोग किया जाना कई शंकाओं को जन्म देता है और नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की ओर इशारा करता है। सुकमा जिले की पेंटाचिमली पंचायत के तुमलपाड़ इलाके में अवैध ढंग से क्रशर प्लांट का संचालन अफसरों के लिए अब सिरदर्द बन गया है। विशेष सूत्रों से से जानकारी मिली है कि दो प्रशासनिक अफसरों का सड़क निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों से सांठगांठ के कारण अवैध ढंग से क्रशर प्लांट का संचालन कराया जा रहा है। इन दोनों प्रशासनिक अफसरों का वहां से तबादला हो चुका है। एक दंतेवाड़ा जिले में वर्तमान कलेक्टर है तो दूसरे का संभाग से बाहर तबादला किया जा चुका है। वन विभाग के एक अफसर पर भी उंगली उठने लगी है। वन विभाग द्वारा भी वन क्षेत्र में अवैध क्रशर संचालन पर किसी प्रकार से रोक नहीं लगाई गई। ऐसे में इनकी भी संलिप्तता होने की चर्चा है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष हरीश कवासी पूर्व कलेक्टर पर ग्रामीणों को झुठा आश्वासन देने का आरोप लगा चुके हैं।
क्रशर संचालन का नियम
मिली जानकारी के अनुसार स्टोन क्रशर संचालन करने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति लेनी होती है। संबंधित विभागों की शर्तों का पालन करना होता है। लेकिन संचालक द्वारा इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। क्रशर संचालन के पूर्व ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाती है। लेकिन पंचायत से भी क्रशर संचालन का प्रस्ताव नहीं लिया गया है। खबर है कि पंचायत के प्रस्ताव में भी फर्जीवाड़ा का खेल खेला गया है।
थाने में सूचना देने के बाद ब्लास्टिंग
नियमों के अनुसार क्रशर प्लांट में ब्लास्टिंग की सूचना संबंधित थाने को देनी होती है। थाने से सूचना मिलने एवं थाने के कर्मचारी की उपस्थिति में ब्लास्टिंग का प्रावधान है। इसके साथ-साथ विस्फोट सामग्री को थाने में रखे जाने का प्रावधान है। इन सारे नियमों को भी दर किनार कर दिया गया है। संबंधित थाने को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि उक्त क्रशर में कितनी मात्रा में बारूद का उपयोग किया गया और कितनी बार ब्लास्ट किया गया है।
अफसरों के लिए सिरदर्द
तुमलपाड़ इलाके में संचालित खदान में यह स्पष्ट हो चुका है कि यह अवैध ढंग से संचालित की जा रही है। भले ही अफसर मामले की जांच की दुहाई दे रहे हैं लेकिन उनके लिए यह खदान सिरदर्द बन गया है। जिले के दोनों जिम्मेदार अफसर हाल ही में सुकमा जिले की कमान संभाले हैं। उनके लिए इस खदान का मामला बड़ा ही पेचीदा हो गया है। कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण एवं विपक्ष में बैठी कांग्रेस हल्ला बोलेगी। अगर कार्रवाई हुई तो उन गुनहगारों पर भी कार्रवाई करनी होगी ऐसे में बड़ा ही संकट खड़ा हो गया है। खबर है कि कलेक्टर मामले को लेकर जांच करा रहे हैं और सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। उधर पुलिस अधीक्षक भी विस्फोटक सामग्री उपयोगी को लेकर जांच करा रहे हैं।