रायपुर/जगदलपुर। बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने क्षेत्र के विकास को लेकर व्यापक योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया है। बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर अब बदलाव के दौर से गुजर रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा के साथ विकास का नया माहौल बन रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित रहे।
अमित शाह ने कहा कि लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों ने बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रभावित किया, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार बाधित रहा। उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं और बस्तर को देश के सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्रों में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग, आधार सेवाएं, डिजिटल सुविधाएं, कौशल प्रशिक्षण, राशन व्यवस्था, प्राथमिक शिक्षा और आंगनबाड़ी जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी।
महिला सशक्तिकरण को विकास की प्रमुख कड़ी बताते हुए शाह ने कहा कि आदिवासी महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत पशुपालन आधारित योजनाएं तैयार की जा रही हैं और आने वाले महीनों में क्षेत्र में डेयरी नेटवर्क के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि बस्तर सहित नक्सल प्रभावित इलाकों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए सड़क और संचार सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया गया है, जबकि मोबाइल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में टावर स्थापित किए गए हैं।
इसके अलावा बैंक शाखाओं, एटीएम, डाकघरों, एकलव्य विद्यालयों, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना के जरिए युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान गृह मंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान में विभिन्न राज्यों के सहयोग का उल्लेख करते हुए राजनीतिक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बस्तर की पहचान नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विकास, रोजगार, खेल और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के केंद्र के रूप में स्थापित होगी।