किंगपिन के चहेते की करतूत से कांग्रेस को फिर लगने वाला है जोर का झटका

0  फिर दो बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ने की चर्चा 

(अर्जुन झा) जगदलपुर। कांग्रेस में भगदड़ मची है और भाजपा में बहार आई हुई है। बस्तर के कई बड़े कांग्रेस नेताओं पर भगवा रंग चढ़ चुका है। इस बीच कांग्रेस को एक और जोर का झटका लगने वाला है।छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की लुटिया डुबोने में जुटे एक किंगपिन और उनके चंद चहेतों की करतूत से हताश निराश बस्तर के दो और बड़े कांग्रेस नेताओं के भाजपा में जाने की पूरी तैयारी है। ऐसे में तो बस्तर में कांग्रेस का राम ही मालिक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 अप्रैल को प्रस्तावित बस्तर प्रवास के पहले ही कांग्रेस में बड़ा तूफान आने के संकेत राजनीतिक मौसम वैज्ञानियों ने दे दिए हैं। पूरे देश में कांग्रेस की स्थिति बड़ी डांवाडोल हो गई है। बड़े बड़े नेता कांग्रेस से पलायन करने लगे हैं। कांग्रेस में आए इस भूचाल से बस्तर भी अछूता नहीं रह गया है। कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नेता रामजी की दुहाई देते कह रहे हैं कि कांग्रेस राम विरोधी और हिंदू विरोधी हो चली है, इसलिए उन्हें कांग्रेस छोड़ने मजबूर होना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर बस्तर में कांग्रेस छोड़ने का जो सिलसिला चल रहा है, उसकी वजह कुछ और है। कुछ लोग व्यक्तिगत कारणों से, कुछ लोग अपने दामन पर लगे दाग को भाजपा की वाशिंग मशीन में धुलवाने के लिए, तो कुछ लोग स्थानीय कांग्रेस नेताओंके उकसावे में आकर भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं। अब खबर है कि बस्तर के दो और बड़े कांग्रेस नेता जल्द ही कांग्रेस को टाटा, बाय बाय.. खतम कह सकते हैं। इन दोनों नेताओं के भी भाजपा में जाने की पूरी तैयारी है। कांग्रेस शासन में ‘ऊर्जा’ से जुड़े रहे एक बस्तरिहा कांग्रेस नेता की कारगुजारी की वजह से इन दोनों कांग्रेस नेताओं के कांग्रेस से पलायन की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बस्तर के अमाबेल में होने वाली सभा के दिन या उसके पहले जगदलपुर के दो धाकड़ कांग्रेस नेता बीजेपी के पाले में जा सकते हैं। इसके लिए समय और परिस्थिति भी लगभग तय हो चुकी है। निगम महापौर और कुछ पार्षदों के बीजेपी में आसानी से प्रवेश से उत्साहित कांग्रेस नेता जो प्रदेश के पूर्व बड़े मंत्री के समर्थक रहे है अपने कट्टर समर्थकों के साथ बीजेपी में प्रवेश करने की योजना को बीजेपी के एक स्थानीय बड़े नेता से मिलकर अंतिम रूप देने में लगे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त तेलगुभाषी कांग्रेस नेता और कांग्रेस की मजदूर शाखा से जुड़े एक अन्य नेता इस बार लोकसभा चुनाव में अपनी उपेक्षा से काफी व्यथित हैं। उनका कहना है कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अब कांग्रेस में कोई कद्र नहीं है। केवल किंगपिन समर्थक कांग्रेसी ही बस्तर में अपनी मनमानी कर रहे हैं। पिछले दिनों किंगपिन के लिए काम करने वालों का एक समूह अपनी कमाई के साधन की सुरक्षा हेतु बीजेपी में एक मोटी रकम देकर गया था, किंतु इस बार बात वैसी नहीं है।

कांग्रेस से उकताहट की वजह

लोकसभा चुनाव से पूर्व ऐसे निष्ठावान कांग्रेसी नेताओं को बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस प्रत्याशी के अस्तित्व पर कई सवाल उठ खड़े हो सकते हैं। बताते हैं कि पूरे बस्तर विधानसभा क्षेत्र में क्रेडा के माध्यम से कराए गए कार्यों में ठेकेदारों की भूमिका पर कांग्रेस के ही नेताओं ने सवाल उठाए थे, किंतु किंगपिन के आशीर्वाद से चलने वाले नेताओं ने इन निष्ठावान नेताओं की एक नहीं सुनी। तभी से उनमें कांग्रेस के प्रति उकताहट शुरू हो गई थी। अब हालत यह है कि किंगपिन और मौनी बाबा समर्थक नेता बीजेपी में जाने के लिए उत्साहित हैं। मौनी बाबा कमाई और मलाई खाने में इतने व्यस्त रहे हैं कि अपने कट्टर समर्थकों को भी भुला बैठे। विभाग से जुड़ी उनकी शिकायतों पर भी मौनी बाबा ने कोई ध्यान नहीं दिया। इससे दुखी होकर ऐसे वजनदार कांग्रेस नेता अब बीजेपी में जाने का मन बना चुके हैं। अब केवल समय और समझौते की तारीख तय होनी शेष है। अगर सुपारी किलर कांग्रेसी का यह दांव चल गया तो मोदीजी के आगमन के दिन या पूर्व कांग्रेस को एक और विखंडन देखना पड़ सकता है।

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