रायपुर। खाद की समस्या, वितरण को लेकर बदइंतजामी और अमानक, गुणवत्ताहीन नकली उर्वरक के रैकेड को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार जानबूझकर किसानों की आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध नहीं कर रही है जिसके कारण ही किसान नकली और अमानत खाद लेने मजबूर है। गृह मंत्री के गृह क्षेत्र कवर्धा में किसानों के साथ धोखा उजागर हुआ है, किसानों को बेचे गए पोटास की बोरी में 60 प्रतिशत पोटाश लिखा है, जबकि लैब में परीक्षण के परिणाम मे पोटाश की मात्रा है ही नहीं, यह पहली घटना नहीं है पूरे प्रदेश में नकली और अमानत खाद बड़े पैमाने में खपाए जा रहे है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि किसान विरोधी सरकार की बदइंतजामी के चलते प्रदेश के सहकारी समितियों में डीएपी और यूरिया की किल्लत से खरीफ फसलों की बुआई पिछड़ गई है। धान की बुआई के समय किसानों को डीएपी की सख्त जरूरत होती है, लेकिन अधिकांश प्राथमिक कृषि साख समितियों और सहकारी संस्थाओं में इसका भारी अभाव है। किसानों को डीएपी के स्थान पर एनपीके जैसे वैकल्पिक खाद लेने की सलाह दी जा रही है, जो समय पर उपलब्ध नहीं है, कीमत और प्रभाव में भी अंतर है। नैनो डीएपी की गुणवत्ता और असर पर किसानों को भरोसा नहीं है, अमानक, गुणवत्ताहीन, नकली खाद बीज की शिकायतें भी आम हो चुकी है। सरकार की दुर्भावना के चलते ही प्रदेश में उर्वरक का संकट विकराल रूप ले चुका है। सरकार बताये बिना उर्वरक के खेती कैसे करें किसान। प्रदेश में उर्वरक के लिये मारा-मारी शुरू हो गयी है। किसानों को सोसायटी में खाद नहीं मिल रहा है। किसान बार-बार सरकार के मंत्रियों, विधायकों, सांसदों से उर्वरक के बारे में गुहार लगा रहे, लेकिन सरकार केवल जुबानी आश्वासन दे रही है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि आज भी प्रदेश के आधे से कम सोसायटियों में ही खाद पहुंच पाया है। मानसून आ चुका है, खरीफ में धान की फसल ही राज्य के किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है। यदि खरीफ के सीजन में सरकार किसानों को पर्याप्त उर्वरक नहीं दे पायेगी तो किसानों के सामने साल भर के लिये आजीविका का संकट पैदा हो जायेगा।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि अभी तक सोसायटियों में खाद का न पहुंचना चिंता पैदा कर रहा। इस खरीफ सीजन में 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता अनुमानित है, पर यह सरकार 50 प्रतिशत स्टाक भी नहीं जुटा पाई है। पिछले खरीफ सीजन में राज्य के किसानों को 14 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता थी, साय सरकार शुरू के दो माह तक मात्र 80 हजार मीट्रिक टन ही उर्वरक दे पायी थी, आखिर तक जरूरत से आधे का भी इंतजाम नहीं कर पाई सरकार। इस खरीफ सीजन के कुल लक्ष्य का केवल 26 प्रतिशत खाद ही किसानों को मिल पाया है, किसान यूरिया से लेकर डीएपी और पोटाश सभी के लिए भटकते रहे, बिचौलियों के द्वारा ब्लेक मार्केट में तीन से चार गुने दाम में किसानों को यूरिया और डीएपी खरीदने को मजबूर होना पड़ा था।