नगर निगम जगदलपुर में बिना अवेजीदार कर्मचारियों का स्थानांतरण से आक्रोश

0  एकसाथ तीन कंप्यूटर ऑपरेटरों का तबादला 
0  योग्य कर्मियों की नहीं हुई नगर निगम में नियुक्ति 
जगदलपुर। नगरीय निकायों के कर्मचारियों के स्थानांतरण में नगर पालिक निगम जगदलपुर के कई कर्मचारियों का स्थानांतरण अनुसूचित क्षेत्र से बाहर किया गया है। उन कर्मचारियों के पदों के विरुद्ध किसी का स्थानांतरण नगर निगम जगदलपुर में नहीं किया गया है। कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनके घरों में सिर्फ वही व्यक्ति रोजगार में है।
कर्मचारी संघ का आरोप है कि निगम के कुछ लोगों द्वारा अनावश्यक राजनीतिक दबाव बनाकर उनका स्थानांतरण करवाया गया है। जबकि उनके पदों और कार्यशैली से निगम के कार्यों का संचालन किया जा रहा है। ऐसे लापरवाही भरे आदेश से निगम की कार्यप्रणाली ठप हो जाएगी। जिन कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया है उसमें सहायक कार्यालय अधीक्षक, सहायक ग्रेड 2 सहित कंप्यूटर ऑपरेटर भी शामिल हैं। ज्ञात हो यह ऐसे कर्मचारी हैं जिन्होंने निगम में पदोन्नति की मांग निगम प्रशासन के सामने रखी थी। इस आदेश से साबित होता है कि उन्हें रोकने के लिए ही निकाय से स्थानांतरित किया गया है जिससे कुछ लोगों का स्वार्थ पूर्ण हो सके। शैक्षणिक योग्यता के बाद भी कई ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें कंप्यूटर में कार्य ही नहीं आता है और निगम में पदस्थ 3 कंप्यूटर ऑपरेटर का एक साथ स्थानांतरण कर दिया गया है जिनके एवज में किसी को नगर निगम जगदलपुर में पदस्थ नहीं किया गया है। एकमात्र सहायक कार्यालय अधीक्षक का भी ट्रांसफर चिरमिरी किया गया है उसके एवज में भी किसी की पोस्टिंग यहां नहीं की गई है। नगर निगम के वरिष्ठ एवं अनुभवी लिपिक पूरन देवांगन का ट्रांसफर नगर निगम भिलाई में किया गया है जबकि लोक निर्माण शाखा में उनसे ज्यादा अनुभव किसी को नहीं है?खबर है कि कुछ दिन पहले निकाय में गलत पदोन्नति की शिकायत पूरन देवांगन द्वारा शासन एवं प्रधानमंत्री कार्यालय तक की गई थी।
सवाल उठता है कि बिना कर्मचारियों के कैसे नगर निगम जगदलपुर कार्य संचालन करेगा यह तो स्थानीय कलेक्टर और संभागायुक्त के समझ की बातें हैं। क्या महापौर और उनकी एमआईसी शासन के नियमों के विरुद्ध इन्हें भारमुक्त न करने का दबाव बनाएगी अथवा जिला प्रशासन इसे संज्ञान में लेकर अवेजीदार की पदस्थापना तक उन कर्मचारियों को भारमुक्त होने से रोक लगा देगा। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों से चर्चा करने पर उन्होंने शासन के नियमों का हवाला दिया है और निर्णय प्रशासन के हाथों होने की बात कही है। जबकि शासन की स्थानांतरण नीति जो विगत वर्ष जारी की गई थी उसकी कंडिका में स्पष्ट लिखा गया है कि बिना अवेजीदार के भारमुक्त नहीं किए जा सकेंगे इस संबंध में नस्ती जिला कलेक्टर के माध्यम से स्वीकृत करने उपरांत ही उन्हें भारमुक्त किया जा सकता है।

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