रायपुर। खाद की पर्याप्त उपलब्धता के सरकारी दावों को किसानों के साथ भद्दा मज़ाक बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूरे प्रदेश में खाद की कमी के कारण बोनी और थरहा का काम प्रभावित हो रहा है, किसानी पिछड़ रही है लेकिन सत्ता में बैठे जिम्मेदार केवल फर्जी दावें करके अपनी जिम्मेदारियों से दूर भाग रहे हैं। मात्र 24 हजार टन डीएपी के कागजी आबंटन को अपनी उपलब्धि बता कर श्रेय लेने वाले भाजपा नेताओं को यह बताना चाहिए खुद के ही द्वारा तय लक्ष्य 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन में से केवल 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन खाद ही किसानों को दिया गया है जो कि मांग के आधे से भी कम है। सबसे कम वितरण डीएपी और यूरिया का है जो किसानों के मांग की तुलना में चौथाई भी नहीं है। कभी किस्तों में खाद तो कभी टोकन पर देने के तुगलकी फरमान जारी किए, पिछले साल की तुलना में डीएपी में 40 प्रतिशत कटौती और यूरिया 20 प्रतिशत कम देने का आदेश? फिर टोकन सिस्टम वापस ले लिए, तय लक्ष्य का अब तक आधा भी दिए नहीं फिर यह आबंटन अतिरिक्त कैसे? किसानों को ठगना बंद कर समस्या के समाधान पर ध्यान दे सरकार।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह पहला अवसर है जब जुलाई के महीने में भी किसानों की जरूरत के आधे मात्रा में भी खाद का वितरण नहीं किया गया है। पहले अप्रैल के महीने में ही वितरण शुरू हो जाता था और जून के महीने तक वितरण लगभग पूर्ण हो जाता था। मानसून आने से पहले ही सोसायटियों के गोदाम से होकर किसानों तक खाद पहुंच चुका होता था, अभी आबंटन जारी होने का दावा किया गया है, इस किसान विरोधी सरकार को बताना चाहिए कि कब भौतिक अलॉटमेंट होगा? कब रैक लगेगी? सोसायटियों और किसानों तक कब पहुंचेगा? सड़कों की मरम्मत तक नहीं करवा पा रही है यह सरकार, बरसात में अनेकों गाँव पहुंच विहीन हो चुके हैं, ऐसे में वहां के किसान कैसे खेती कर पाएंगे?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ के किसानों से छल किया है। सोसायटियों में प्रति एकड़ कुल कर्ज में से नकदी और खाद/बीज की मात्रा जो पहले 60 अनुपात 40 था, जिसे अब साय सरकार ने बदलकर 70ः30 कर दिया है, अर्थात अब कुल तय लिमिट का केवल 30 प्रतिशत तक ही अधिकतम खाद दिया जायेगा। पिछले खरीफ सीजन में भी खाद का संकट छत्तीसगढ़ के किसानों ने भोगा है, इस बार स्थिति उससे भी खराब दिख रही है। नकली खाद, अमानक खाद, गुणवत्ताहीन नैनो यूरिया के नाम पर घटिया माल खपाने के लिए किसानों को मजबूर किया जा रहा है। एक तरफ सोसाइटीयों में खाद नहीं है, वही सत्ता के संरक्षण में विचलियों और कालाबाजारी करने वालों को खुली छूट है, यूरिया और डीएपी खुले बाजार में तीन से चार गुना महंगे दामों में बिक रहा है, यह सरकार खाद की पर्याप्त उपलब्धता के फर्जी दावें करके किसानों का मखौल उड़ा रही है।