० डकार गए वर्ष 2018 से 2024 तक की बोनस राशि
० कांग्रेस सरकार के घोटाले को दबाने में जुटे अफसर
(अर्जुन झा)जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले में5 करोड़ के तेंदूपत्ता बोनस घोटाले के पुराने मामले के बाद अब करोड़ों के तेंदूपत्ता बोनस महाघोटाले का नया मामला सामने आया है।. पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान हुए इस महाघोटाले को वरिष्ठ अधिकारी दबाने की कोशिश में लगे हैं।
सुकमा वन मंडल में तेंदूपत्ता बोनस वितरण में करोड़ों का घोटाला किए जाने की खबर है। गुनाहों पर पर्दा डालने के उद्देश्य से प्रबंध संचालक जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित सुकमा ने नियमों का हवाला देकर वर्ष 2018 से 2024 तक के बोनस वितरण की समितिवार जाकनारी देने से इंकार कर दिया। जबकि वर्ष 2021-22 में बोनस वितरण में 5 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में तत्कालीन डीएफओ एवं समिति प्रबंधक पर कार्रवाई की गाज गिरी थी। पिछले 4 वर्षों की बोनस वितरण की फाईल आपेन हुई तो करोड़ों का घोटाला उजागर हो सकता है। हजारों संग्राहकों को लाभांश राशि से वंचित किए जाने का मामले भी पर्दाफाश हो सकता है। यहां अधिकारी कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसी खबर है कि राजधानी में बैठे एक अफसर के इशारे पर स्थानीय अधिकारी जानकारी देने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं और नियमों का हवाला देकर अपनी कलम बचाने में लगे हैं। ज्ञातव्य हो कि सुकमा जिला भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में रहा है। चाहे वह पंचायतों में कागजों पर विकास की बात हो या तेंदूपत्ता बोनस वितरण का मामला हो। वर्ष 2021-2022 के बोनस वितरण में 5 करोड़ से अधिक की लाभांश राशि डकार ली गई थी। आज तक तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस भुगतान नहीं हो पाया है। इसके पूर्व के वर्षों के बोनस वितरण की पड़ताल की जाए, तो हजारों संग्राहकों की करोड़ों की लाभांश राशि समिति प्रबंधक एवं अधिकारी डकार लगा चुके हैं।अधिकारियों की मिलीभगत से ही उन गरीब आदिवासियों को लाभांश राशि नसीब नहीं हो पाई, जो चिलचिलाती धूप में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य करते रहे हैं। खबर है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में कुछ संग्राहकों को लाभांश राशि आधी अधूरी दी गई और पूरा भुगतान दर्शा कर उनसे अंगूठा निशानी लगवा ली गई। दस्तावेजों में पूरी राशि वितरण बताकर रिपोर्ट राजधानी भेजी जा चुकी है। बोनस वितरण की निष्पक्ष रूप से पड़ताल हुई तो कांग्रेस सरकार का एक बड़ा घोटाला और उजागर हो सकता है।
आखिर ऎसी परहेज क्यों?
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 से 2024 तक कितना मानक बोरा तेंदूपत्ता क्रय किया गया था, इसके एवज में समितिवार कितने संग्राहकों को लाभांश राशि वितरित की गई है इस बारे में विभाग ने नियमों का हवाला देकर जानकारी देने से इंकार कर दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुकमा में विवादित कांग्रेस सरकार का और एक घोटाला उजागर हो सकता है। जिसे अधिकारी फाईलों में बंद रखना चाह रहे हैं।सुकमा वन मंडल में वर्ष 2021-22 के बोनस घोटाला मामले में तत्कालीन डीएफओ अशोक पटेल सहित कई प्रबंधक एवं कर्मचारी जेल का सफर भी तय कर चुके हैं। आज ये जमानत पर बाहर है। गरीबों के राशि डकारने वाला मुख्य सरगना जिसके इशारों पर वर्षों से गरीबों की राशि हड़पी जाती रही किस्टाराम समिति के उस प्रबंधक पर पुलिस मेहरबान बनी हुई है। जांच में जुटी एसीबी के अफसर भी इस मामले में चुप्पी साध चुके हैं। ऐसी चर्चा है कि राजधानी के एक अफसर से करीबी होने के कारण पुलिस भी सरगना तक नहीं पहुंच रही है। 10 समितियो के लगभग 34 हजार संग्राहकों की 5 करोड़ से अधिक राशि का भुगतान नही हो पाया है। लाभांश राशि के भुगतान के संबंध में विभाग के अफसर एक वर्ष से रटा रटाया एक ही जवाब देते आ रहे हैं कि समितियों में सर्वे कराया जा रहा है और भुगतान शीघ्र किया जाएगा।