0 होलसेलरों पर शासन क्यों है इतना मेहरबान?
0 होलसेलर मंहगी दरों पर रिटेलर्स को उपलब्ध करा रहे हैं उर्वरक
0 राजधानी के कारोबारियों की शुरू हो गई मनमानी
(अर्जुन झा) जगदलपुर। उर्वरक कारोबार से जुड़े छोटे व्यापारियों के लिए आगामी खरीफ का सीजन घाटे वाला साबित होने जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी ऊपर से मिले आदेशों का हवाला देकर रिटेलर उर्वरक विक्रेताओं पर कार्रवाई करने कमर कस चुके हैं। जानकारी के अनुसार अब तक आधा दर्जन से अधिक छोटे कारोबारियों को नोटिस थमाए जा चुके हैं। मंहगे दामों पर उर्वरक बिक्री करने वाले होलसेलर कारोबारियों पर प्रशासन मेहरबान बना हुआ है। इसके चलते अंततः किसानों का हीं गला कटना है।
बता दें कि होलसेलर यूरिया 375 से लेकर 450 रूपये प्रति बैग उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं कृषि विभाग रिटेलरों पर 266 रुपए की दर से बिक्री का दबाव बना रहे हैं। विभाग की दोहरी नीति के कारण रिटेलर इस खरीफ सीजन में उर्वरक बिक्री से हाथ खींचने की तैयारी में हैं। ज्ञात हो कि खरीफ सीजन के लिए बस्तर जिले में 46 हजार मिट्रिक टन उर्वरक की खपत का लक्ष्य रखा गया है जिसमें 23 हजार मिट्रिक टन से अधिक उर्वरक भंडारित किया जा चुका है। इसमें शासकीय एवं प्राईवेट कारोबारी शामिल हैं। बस्तर जिले में 1 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि पर कृषि होनी है जहां निर्धारित उर्वरक का उपयोग किया जाना है। रिटेलर होल सेलर्स से मंहगे दामों पर उर्वरक खरीदने मजबूर हैं। कृषि विभाग के अधिकारी जहां छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई को लेकर कमर कस चुके हैं। जिसको लेकर उर्वरक के छोटे कारोबारियों में दहशत का माहौल है। कृषि विभाग के अधिकारी जहां शासन की निर्धारित दरों पर उर्वरक बिक्री का दबाव बना रहे हैं तो वहीं रिटेलरों को बड़े कारोबारियों द्वारा मंहगे दामों पर उर्वरक उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग के अधिकारी भी इस बात से पूरी तरह अवगत हैं कि होलसेलर उर्वरक,m रिटेलरों का मंहगे दामों पर उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बाद होलसेलरों पर अफसर मेहरबान बने हुए हैं और छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर शासन से वाहवाही लूटने में लगे हैं। जिला प्रशासन होलसेलरों पर नजर रखे तो किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर उर्वरक उपलब्ध हो पाएगा।
खरीदी बिक्री का ऐसे चल रहा खेल
उर्वरक के लायसेंसी छोटे कारोबारियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया है कि बस्तर से लेकर राजधानी तक के होलसेलर्स द्वारा छोटे कारोबारियों को अब तक यूरिया 350 से 450 की दर पर दी गई है। इसके साथ-साथ लोडिंग और अनलोडिंग का चार्ज भी रिटेलर्स से वसूला जा रहा है। हाल ही मे यूरिया की दो रेक पहुंची थी। इस यूरिया की बिक्री 400 से 500 रूपये तक प्रति बैग की दर पर रिटेलर्स को की गई। कुछ कारोबारियों को 270 रूपये प्रति बोरी की दर से यूरिया उपलब्ध कराई गई है जिसमें 1 लाख 50 हजार से लेकर 2 लाख तक का उदान भी थमाया गया है। इस प्रकार 670 बोरी यूरिया का दाम निकाला जाए तो किराए के साथ 3 लाख 90 हजार रुपए होता है। प्रति बोरा रिटेलरों को 580 से 585 रुपए तक की खरीदी दर पड़ती है। ऐसे में छोटे रिटेलरों को कृषि विभाग द्वारा 266 रूपये प्रति बोरा बिक्री का दबाव बनाया जाना उर्वरक कारोबारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यूरिया ही नहीं सभी उर्वरक निर्धारित से मंहगे दामों पर रिटेलरों को उपलब्ध कराई जा रही है और विभाग होलसेलरों पर मेहरबान बना हुआ है।
विभाग को किसानों की चिंता नहीं
बस्तर जिले के जिम्मेदार अधिकारी से मामले की शिकायत करने पर उन्होंने कहा कि मेरा काम शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन कराना है, रेट निर्धारित करना नहीं। कौन किस दर से खरीदी बिक्री कर रहा है, मुझे इससे मतलब नहीं है। इस जवाब से साफ जाहिर होता है कि कृषि विभाग और शासन को किसानों की कतई फिक्र नहीं है। किसान खाद खरीदने के लिए होल सेलर्स की दुकानों में तो जाएंगे नहीं। उन्हें अपनी जरूरत की खाद के लिए फुटकर विक्रेताओं का ही सहारा लेना पड़ेगा। ऐसे में किसानो के हितों को देखते हुए कृषि विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे होलसेलर्स से रिटेलर्स को शासन द्वारा तय दरों पर खाद उपलब्ध कराए, ताकि किसानों का भला हो सके।