ओबीसी समाज के साथ फिर छलावा – तरुण धाकड़

०  जनगणना प्रपत्र में अलग कॉलम न होने पर ओबीसी वर्ग नाराज 
जगदलपुर। भारत सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के संबंध में 14 अगस्त को अधिसूचना जारी की गई है। इस अधिसूचना में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए अलग-अलग कॉलम है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए ऎसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसे लेकर पिछड़ा वर्ग समुदाय में गहरी नाराजगी है। इस पर सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के बस्तर संभागीय अध्यक्ष तरुण सिंह धाकड़ ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे पिछड़ा वर्ग के साथ छलावा करार दिया है।
तरुण सिंह धाकड़ ने कहा है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक विषय है। देश की एक बड़ी आबादी ओबीसी समाज से आती है, फिर भी जातिगत जनगणना में ओबीसी समाज की स्वतंत्र एवं स्पष्ट गणना के लिए अलग कॉलम नहीं होना सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।ओबीसी समाज लंबे समय से अपनी वास्तविक जनसंख्या के आंकड़े सामने लाने और जनसंख्या के अनुपात में अधिकार, प्रतिनिधित्व एवं हिस्सेदारी की मांग करता आ रहा है। यदि जातिगत जनगणना में ओबीसी समाज की अलग से सही गणना ही नहीं होगी, तो समाज की वास्तविक संख्या और सामाजिक, आर्थिक स्थिति का सही आंकलन कैसे हो पाएगा?
श्री धाकड़ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जातिगत जनगणना में ओबीसी समाज के लिए अलग एवं स्पष्ट कॉलम का प्रावधान किया जाए तथा ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या की निष्पक्ष एवं पारदर्शी गणना सुनिश्चित की जाए। तरुण सिंह धाकड़ का कहना है कि यह केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकार, सम्मान, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय का विषय है।