जमीन के पट्टे के लिए भटक रहा है किसान, नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

० किसान ने लोन और खाद-बीज के लिए कराई लथी पट्टा बनाने की प्रक्रिया पूरी 
०  समय पर न मिलने से फसल पर पड़ा असर 
बकावंड। बस्तर जिले की करपावंड तहसील में राजस्व प्रकरण के निराकरण में देरी का खामियाजा एक किसान को भुगतना पड़ रहा है। ग्राम मैलबेड़ा के एक गरीब किसान ने अपनी जमीन का पट्टा प्राप्त करने के लिए करीब तीन महीने पहले प्रक्रिया शुरू कराई थी। किसान का कहना है कि प्रकरण से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसके बावजूद अब तक उसके हाथ में पट्टा नहीं पहुंच पाया है।
किसान के अनुसार पट्टा मिलने की प्रत्याशा में वह बैंक से कृषि लोन लेने तथा खाद-बीज की व्यवस्था करने की उम्मीद पाले बैठा था। इसी उम्मीद के दम पर उसने अपने खेत में मक्का और धान की फसल भी लगाई। लेकिन समय पर पट्टा नहीं मिलने के कारण उसे कृषि ऋण और खाद नहीं मिल पाई। अब उसे आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खाद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाने से खेत और फसल पर भी इसका असर पड़ने की बात किसान ने कही है। किसान का आरोप है कि पट्टा बनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पटवारी रोहित बघेल और तहसील कार्यालय की ओर से उसे अब तक पट्टा उपलब्ध नहीं कराया गया है। किसान का कहना है कि जब भी वह जानकारी लेने पहुंचता है तो उसे जल्द पट्टा मिलने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। मामले को लेकर किसान ने करपावंड तहसीलदार रूपेश मरकाम से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई। किसान के मुताबिक तहसीलदार ने उसे आश्वासन दिया था कि मंगलवार को पट्टा मिल जाएगा, लेकिन मंगलवार भी गुजर गया और किसान को अब तक पट्टा नहीं मिला।


कब होगा किसान का “मंगल”?
किसान का कहना है कि अधिकारी लगातार तारीख और आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन वास्तविक रूप से दस्तावेज कब मिलेगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी जिस मंगलवार को पट्टा देने की बात कह रहे थे, वह मंगलवार भी निकल गया। अब किसान के सामने सवाल है कि आखिर वह मंगलवार कब आएगा, जब उसे उसका पट्टा मिलेगा। गरीब किसान का कहना है कि यदि उसे समय पर पट्टा मिल जाता तो वह बैंक से ऋण लेकर खाद-बीज की व्यवस्था कर सकता था और अपनी फसल को बेहतर तरीके से संभाल सकता था। लेकिन दस्तावेज नहीं मिलने के कारण आर्थिक संसाधनों की कमी बनी हुई है और इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। किसान ने प्रशासन से मांग की है कि उसके लंबित राजस्व प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करते हुए तत्काल पट्टा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह बैंक ऋण सहित अन्य जरूरी सुविधाओं का लाभ लेकर अपनी फसल बचा सके। अब देखना होगा कि करीब तीन महीने से लंबित पट्टा प्रकरण में तहसील प्रशासन कब तक कार्रवाई पूरी कर किसान को उसका पट्टा उपलब्ध कराता है?