वर्दी की आड़ में शादी का झांसा, दुष्कर्म और दूसरी शादी; सब इंस्पेक्टर को 10 साल की सजा

० एफटीसी कोर्ट ने कहा- पुलिसकर्मी लोक सेवक होकर किया घृणित अपराध, ₹15 हजार जुर्माना भी

जगदलपुर। पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए युवती को विवाह का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करने और पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने के मामले में अपर सेशन न्यायाधीश एफटीसी शैलेश अच्युत्य पटवर्धन ने अभियुक्त विकेश चौहान को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने धारा 376(2)(ढ) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड तथा धारा 494 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹5 हजार अर्थदंड से दंडित किया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं देने पर क्रमशः तीन माह और एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

कोर्ट की टिप्पणी- लोक सेवक होकर अपराध, कृत्य अनैतिक और घृणित
अपने निर्णय में न्यायाधीश ने कहा कि अभियुक्त पुलिसकर्मी जैसे लोक सेवक के पद पर पदस्थ रहते हुए प्रारंभ से विवाहित था, इसके बावजूद उसने स्वयं का विवाह विच्छेद होने का मिथ्या कथन कर पीड़िता को विवाह का वचन दिया। निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि अभियुक्त ने विवाह का वचन पूरा न करने के आशय से पीड़िता को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर उसकी इच्छा और स्वतंत्र सहमति के बिना जबरन शारीरिक संबंध बनाए तथा उसके साथ दिखावटी विवाह किया।

न्यायालय ने अभियुक्त के कृत्य को अनैतिक, असामाजिक और विधि-विरुद्ध बताते हुए इसे महिला के शरीर और शील के विरुद्ध किया गया घृणित अपराध माना। पुलिसकर्मी एवं लोक सेवक के रूप में उसके पद को देखते हुए न्यायालय ने अपराध की प्रकृति को गंभीर माना और दंड देना उचित पाया।

फेसबुक से शुरू हुई पहचान, तलाकशुदा बताकर जीता भरोसा

अभियोजन के अनुसार विकेश चौहान चित्रकूट चौकी में पदस्थ रहने के दौरान पीड़िता के संपर्क में आया था। दोनों की पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई थी। पीड़िता उसकी दूर की रिश्तेदार भी थी। बातचीत के दौरान विकेश ने स्वयं को तलाकशुदा बताया और विवाह का भरोसा दिलाकर उसका विश्वास हासिल किया।

नवंबर 2018 में वह पीड़िता के माता-पिता से मिला और विवाह का आश्वासन देकर उसे जगदलपुर ले आया। पीड़िता उसके साथ पुलिस क्वार्टर में रही। आरोप के अनुसार 6 जनवरी 2019 को विवाह का भरोसा देकर उसने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद चित्रकूट के शिव मंदिर में ले जाकर विवाह किया और दोनों साथ रहने लगे।

पहली पत्नी के जीवित होने का पता चला तो खुला राज

बाद में पीड़िता को पता चला कि विकेश की पहली पत्नी जीवित है और दोनों का तलाक नहीं हुआ है। पूछने पर अभियुक्त कथित तौर पर गोलमोल जवाब देने लगा। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी और न्यू राजेंद्र नगर थाना, रायपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई।

अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। बताया गया कि घटना के समय अभियुक्त पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ था और मामले की कार्रवाई के दौरान अग्रिम जमानत पर था। लोक अभियोजक प्रीति वानखेड़े ने अभियोजन की ओर से पैरवी की।

फैसले में कोर्ट की सख्त टिप्पणी

“लोक सेवक होकर किया अपराध”
न्यायालय ने अभियुक्त के कृत्य को अनैतिक, असामाजिक एवं विधि-विरुद्ध बताते हुए कहा कि पुलिसकर्मी जैसे लोक सेवक द्वारा किया गया यह अपराध गंभीर प्रकृति का है। अभियुक्त ने स्वयं को तलाकशुदा बताकर पीड़िता को विवाह का भरोसा दिया और बाद में उसके साथ दिखावटी विवाह किया।