0 कांग्रेस नेता ने कुलपति पर लगाए गंभीर आरोप
जगदलपुर। छत्तीसगढ कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति मनोज श्रीवास्तव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके मुताबिक जगलपुर के पूर्व विधायक ने कुलपति पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों से लाखों के लेनदेन करने का आरोप लगाए थे। मगर कुलपति ने जगदलपुर के सत्ताधारी भाजपा के पूर्व विधायक पर ही अनर्गल बयान देकर विश्वविद्यालय और उनकी छवि को धूमिल करने एवं भर्ती में लेन-देन का प्रमाण देने की चुनाैती देकर छत्तीसगढ की भाजपा सरकार काे ही कटघरे में खड़े कर दिया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर शुक्ला ने एक बयान जारी कर कहा है कि कुलपति मनोज श्रीवास्तव ने जगलपुर के पूर्व विधायक काे उनके लगाए गए आरोपाें के लिए खुली चुनाैती दी है, जिसे स्वीकार कर भर्ती प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार काे उजागर कर इसका पटाक्षेप करने का साहस दिखाना चाहिए। कुलपति के मीडिया में छपे बयान को गंभीरता से लेते हुए बस्तर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया और कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव की गतिविधियां पिछली भर्ती से ही संदिग्ध रही हैं। कुलपति कह रहे हैं कि आरोप निराधार है तो कुलपति ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक अब तक क्यों नहीं की? उन्हाेने कहा कि अब तक बस्तर के स्थानीय जनप्रतिनिधि पूर्व विधायक संतोष बाफना, पूर्व विधायक राजाराम तोडेम, पूर्व मंत्री अरविंद नेताम, कार्य परिषद सदस्य रहे पूर्व कुलपति एसके पाण्डेय एवं स्वयं मेरे (श्री शुक्ला) सहित कई लोगों ने तथ्यों के साथ लगातार इस मामले को उठाया है। यहां तक की सत्ता पक्ष की विधायक लता उसेंडी, अजय चंद्राकर और विपक्षी विधायक देवेंद्र यादव ने भी शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की भर्ती में भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में उठाया था, परंतु गूंगी बहरी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पं. उमाशंकर शुक्ला ने कहा है कि सैकड़ों अभ्यर्थियों ने पिछले भर्ती के भ्रष्टाचार पर एकजुट होकर अनेक फोरमों में कुलपति के विरुद्ध नामजद सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराई थी, परंतु मात्र एक भी शिकायतकर्ता को बुलाकर आरोपो के संबंध में नहीं पूछा गया। उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि कहा कि कुलपति यह भी बताएं की यूजीसी भर्ती नियम और रेग्युलेशन में कहां पर लिखा है कि बिना उम्मीदवारों के नाम जारी किए मात्र एप्लीकेशन आइडी से पात्र अपात्र सूची जारी की जानी है? जबकि यूजीसी नियम साफ कहता है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। लेकिन कुलपति का कहना है कि आरक्षित पदों पर केवल छत्तीसगढ़ के पात्र अभ्यर्थियों का ही चयन संभव है। वहीं अनारक्षित पदों पर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों के संबंध में माैन रहना, क्या उन पर लगाए गए आराेपाें की ओर इशारा नही करता है? पूरी भर्ती प्रक्रिया में गोपनीयता बरतने एवं पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की सूची में से आवेदकों के नाम गायब कर बिना नाम और बिना अंकों के सूची जारी होने से दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया काे क्या दूषित नही करता है? भर्ती प्रक्रिया में शामिल आवेदकाें को यह जानने का हक है कि, उसे किस आधार पर पात्र या अपात्र किया गया है। इसके अलावा, योग्य उम्मीदवारों को बिना कारण बताए नॉट फाउंड सुटेबल घोषित कर देना एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों की उपेक्षा करने जैसी गंभीर अनियमितताओं काे नजरअंदाज नही किया जा सकता है। कुलपति यह भी बताएं कि मेरिट सूची में प्रथम दस स्थान पर रहने वाले प्रतिभाशाली और उच्च योग्यताधारी उम्मीदवारों को छोड़कर मेरिट सूची के अंतिम पायदान के अपने चहेते उम्मीदवारों को साक्षात्कार में अधिक अंक देकर उनका कैसे चयन किया गया? उमाशंकर शुक्ला ने कहा है- कुलपति कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार के प्रमाण देने पर वे तत्काल इस्तीफा दे देंगे तो इसका जवाब यह है कि चोर विडियो शूटिंग करवाकर चोरी नहीं करता है, जिसका विडियो रिकॉर्डिंग हो, चोरी तभी पकड़ में आती है जब तथ्यों की सही तरिके से जांच की जाए। यदि कुलपति में हिम्मत है तो स्वयं के और जो चयनित हुए हैं उन सभी के पिछले एक वर्ष के कॉल डिटेल रिकार्ड और बैक खातों की जांच कराएं, पूरा प्रमाण और सबूत खुद बखुद बाहर आ जाएगा। श्री शुक्ला ने कहा है कि भाजपा सरकार में जरा भी नैतिकता है तो इस भ्रष्ट कुलपति के उपरोक्त तथ्यों के आधार पर न्यायिक जांच कराए और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बस्तर विरोथी कहने वाले निरंकुश कुलपति को तत्काल बर्खास्त करें।