रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में लंबी और तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए कानून-व्यवस्था, किसानों, आदिवासी हितों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली सहित कई मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए और साय सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
बहस की शुरुआत करते हुए डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह केवल विपक्ष का राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की चिंताओं और समस्याओं को सदन के सामने रखने का माध्यम है। उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद और विधानसभाओं में अविश्वास प्रस्ताव सत्ता पक्ष को जवाबदेह बनाने का संवैधानिक तरीका है।
अपने भाषण के दौरान महंत ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, दुष्कर्म और हत्या की घटनाओं, थानों में होने वाली घटनाओं तथा संगठित अपराधों का उल्लेख करते हुए सरकार से अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराध पर अंकुश लगाने के बजाय आलोचना को दबाने में अधिक सक्रिय दिखाई दे रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने हसदेव अरण्य का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हसदेव केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आजीविका और पर्यावरण का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने जंगलों की कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने गुरु घासीदास बाबा के जैतखाम से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों में प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
महंत ने किसानों की समस्याओं को भी विस्तार से उठाया। उन्होंने कहा कि धान खरीदी, भुगतान और सत्यापन से जुड़ी परेशानियों के कारण कई किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और मजदूरों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो पा रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। महंत ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है और युक्तियुक्तकरण के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा चिकित्सा अधिकारियों के अनेक पद रिक्त हैं, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने महतारी वंदन योजना, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से जुड़े कर्ज के बोझ और गरीब परिवारों की आर्थिक परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। महंत ने कहा कि सरकार को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ पात्र हितग्राहियों तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचाने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने अवैध रेत उत्खनन, औद्योगिक प्रदूषण, राखड़ की समस्या और वन क्षेत्रों में बढ़ते दबाव पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ निर्दोष आदिवासियों के अधिकारों और विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष की ओर से जवाब देते हुए भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन तथ्यों के बजाय केवल आरोप लगाने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
चंद्राकर ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए पीएससी भर्ती विवाद, कथित शराब घोटाला, कोयला प्रकरण, भारतमाला परियोजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आरक्षण, पंचायत व्यवस्था और अन्य मामलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कई फैसलों पर आज भी सवाल खड़े हैं और वर्तमान सरकार उन मामलों की जांच तथा सुधार की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि विष्णुदेव साय सरकार ने सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को गति दी है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क, रेलवे और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना जैसे क्षेत्रों में तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है।
बहस के दौरान सदन में कई बार राजनीतिक तंज और हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक कटाक्ष किए, जिससे सदन का माहौल कई बार गरमा गया।
अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के साथ मानसून सत्र का समापन हुआ। बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और पिछली सरकार की कमियों का हवाला देकर सभी आरोपों का जवाब देने का प्रयास किया। पूरे घटनाक्रम ने विधानसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक टकराव की तस्वीर साफ कर दी।