गोठान में फेंके गए तेंदूपत्ता के मामले में लीपापोती

0 तेंदूपत्ता को ठेकेदार का बता रहा वन विभाग, फिर वन कर्मियों ने फेंका क्यों? 
0 वनमंत्री के गृह क्षेत्र के तारागांव का मामला 
(अर्जुन झा) जगदलपुर। वनमंत्री केदार कश्यप के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले भानपुरी फारेस्ट रेंज में हुए तेंदूपत्ता घोटाले में वन विभाग ने लीपापोती का खेल शुरू कर दिया है। विभाग इसे अब नया रूप देने की कोशिश में जुट गया है। तारागांव के गोठान में फेंक दिए गए सैकड़ों गड्डी तेंदूपत्ता को वन विभाग अब ठेकेदार का बता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तेंदूपत्ता ठेकेदार का था, तो उसे वन विभाग के कर्मचारियों ने ट्रैक्टर में भरकर लाकर तारागांव के गोठान में कैसे और क्यों फेंक दिया?
ग्राम तारागांव के गोठान पर पचासों बोरा तेंदूपत्ता को फेंक दिया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि इस तेंदूपत्ता को वन विभाग के ही कर्मचारियों ने ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर लाया था। यह तेंदूपत्ता बनियागांव समिति के अमलीगुड़ा संग्रहण केंद्र में वर्ष 2025 में संग्रहित किया गया था। हरा सोना की सैकड़ों गड्डियों को तारागांव के गौठान पर यूं ही फेंक दिया जाना अब सवालों के घेरे में आ गया है। तेंदूपत्ता आदिवासियों की आय का बड़ा श्रोत है। इसे लावारिस फेंका जाना विभाग के बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। बनियागांव समिति पूर्व में भी विवादित रही है। इस समिति के पूर्व प्रबंधक पर 60 लाख से अधिक के गबन के आरोप लगे थे।बस्तर की प्रमुख वनोपजों में शुमार तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। तेंदूपत्ता बस्तर ही नहीं बल्कि वनों की बहुल सभी राज्यों की प्रमुख वनोपज है, जो खास सीजन में निकलता है। तेंदूपत्ता मुख्यतः बीड़ी बनाने में उपयोग होता है। यह न केवल आदिवासी परिवारों की आजीविका का बड़ा साधन है, बल्कि सरकारों की आय का बड़ा जरिया भी है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए उच्च दर पर तेंदूपत्ता खरीदी, बोनस, चरण पादुका वितरण जैसी व्यवस्थाएं कर रखी हैं। इस कार्य से लाखों परिवारों का गुजारा चलता है। तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए शासन प्रशासन व्यापक व्यवस्थाएं करना पड़ती हैं, इस कार्य में करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। मगर अब वन विभाग के कर्मियों ने ही इस हरे सोने को फेंकना शुरू कर दिया है। वन विभाग के भानपुरी रेंज के अंतर्गत आने वाली पंचायत तारागांव गोठान में वन कर्मियों ने पचासों बोरा तेंदूपत्ता को यूं ही फेंक दिया था। जानकारी के अनुसार भानपुरी उप वन मंडल के अंतर्गत के गोदाम से इस तेंदूपत्ता को ट्रैक्टर के माध्यम से लाकर इसे यहां फेंका गया था। तेंदूपत्ता बोरों पर लगी पर्ची पर समिति का नाम बनियागांव और संग्रहण केंद्र का नाम अमलीगुड़ा अंकित है। पर्ची पर अंकित तिथि के अनुसार यह तेदूपत्ता सन 2025 के सीजन का है। ऐसे में सवाल उठता है कि पिछले सीजन के इस तेंदूपत्ते को आखिर अब तक क्यों दबा कर रखा गया था। इस पूरे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की गंध आ रही है। अब देखना होगा कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्वाचन एवं गृह क्षेत्र में इस घपलेबाजी पर क्या कार्रवाई होती है। वनोपज संघ से जुड़े अधिकारी दलील दे रहे हैं कि यह तेंदूपत्ता किसी व्यापारी के पास बेचा जा चुका है और तेंदूपत्ता बोरों को उसी व्यापारी ने तारागांव के गोठान पर रखवाया था। यह थोथी दलील किसी के भी गले नहीं उतर रही है। क्योंकि भरी बरसात में कोई व्यापारी लाखों में खरीदे गए तेंदूपत्तों को आखिर क्यों भला खुले आसमान तले गोठान पर खराब होने के लिए रखवाएगा? अगर मान भी लें कि यह तेंदूपत्ता व्यापारी का था, तो फिर बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग के कर्मियों ने गोठान तक क्यों पहुंचाया?

व्यापारी का है तेंदूपत्ता
उक्त तेंदूपत्ता का व्यापारी के पास विक्रय किया जा चुका है। व्यापारी द्वारा ग्रेडिंग के आधार पर उसका परिवहन किया जाता है।
-गुलशन साहू,
उप प्रबंध संचालक, वनोपज संघ, बस्तर

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