केरलापाल में भी पादरी और बाहरी धर्म प्रचारकों का प्रवेश वर्जित

० लगाया गया बोर्ड ग्रामीणों ने ग्रामसभा के निर्णय का किया समर्थन
जगदलपुर। बस्तर संभाग में धर्मांतरण की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। गांव-गांव में ग्रामीण अब धर्मांतरण गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ लामबंद होते जा रहे हैं। धर्मांतरण गतिविधियां संचालित करने वाले लोगों के गांवों में प्रवेश पर पाबंदी लगाने का सिलसिला सा चल पड़ा है। ऐसा ही वाकिया बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में भी अब होने लगा है। नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत केरलापाल में ग्रामीणों द्वारा गांव के प्रवेश मार्ग पर एक सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिस पर पादरियों, बाहरी धर्म प्रचारकों एवं धर्मांतरण गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध की बात लिखी गई है। इस संबंध में ग्रामीणों ने ग्रामसभा के प्रस्ताव का हवाला देते हुए बताया कि यह निर्णय गांव की परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बोर्ड में उल्लेख किया गया है कि केरलापाल अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां पेसा अधिनियम 1996 लागू है।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा को स्थानीय परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर बाहरी धर्म प्रचारकों एवं धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लंबे समय से सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक मान्यताओं के संरक्षण को लेकर चर्चा चल रही थी। इसके बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। सूचना बोर्ड लगाए जाने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और उन्होंने ग्रामसभा के निर्णय का समर्थन किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम किसी विशेष समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि गांव की पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। वहीं, इस विषय को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

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