पहले ही दिन अटेंडेंस के फेर में उलझे रहे शिक्षक, नेटवर्क प्रॉब्लम ने किया हलाकान

०  वीएसके एप ने किया शिक्षकों को परेशान 
०  स्कूल के कार्यों को छोड़ अटेंडेंस को प्राथमिकता 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। राज्य में भीषण गर्मी और उमस के बीच स्कूल तो खुल गए हैं, मगर बगैर समुचित तैयारी के शुरू किए गए नए शिक्षण सत्र ने पहले ही दिन पूरे राज्य के शिक्षकों और विद्यार्थियों को बुरी तरह हलाकान कर डाला। बच्चे गर्मी में तड़पते रहे और शिक्षक शिक्षिकाएं ऑनलाइन अटेंडेंस के फेर में उलझे रहे। नेटवर्क कनेक्टीविटी की समस्या, वीएसके एप की खामियों और बिजली की आंख मिचौली ने शिक्षकों और बच्चों की परेशानी को काफी बढ़ा दिया।
छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जिलों के साथ ही मोहला मानपुर, अंबागढ़ चौकी, राजनांदगाव, खैरगढ़, कवर्धा, जशपुर, रायगढ़, समेत अन्य जिलों के सुदूर इलाकों में भले ही मोबाईल टॉवर लग गए हैं, मगर बिजली की समस्या बरकार है। सुदूर गांवों में बार बार और लंबे समय के लिए बिजली गुल रहना आम बात है। टॉवरों की बैटरियां चार्ज नहीं हो पातीं और जनरेटर भी काम नहीं करते। ऐसे में नेटवर्क की समस्या हमेशा बनी रहती है। नतीजतन इन इलाकों में मोबाईल फोन, लैपटॉप, आदि काम नहीं कर पाते। इस अव्यवस्था का आलम पहले ही दिन स्कूलों में देखने को मिला। वेतन रुकने के डर से शिक्षक शिक्षिकाएं वीएसके एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश घंटों करते रहे।शिक्षक विद्यालयीन व्यवस्था को गति देने के बजाय ऑनलाइन उपस्थिति दिखाने में लगे रहे। समय पर स्कूल पहुंच जाने के बाद भी ज्यादातर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। छ्ग टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव और बस्तर जिला अध्यक्ष का कहना है कि हमें ऑनलाइन उपस्थिति से आपत्ति नहीं है, बल्कि शिक्षकों के स्वयं के मोबाइल में ऑनलाइन उपस्थिति के लिए बाध्य करने पर आपत्ति है। ऑनलाइन उपस्थिति के लिए शासन-प्रशासन की ओर से संसाधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।एसोसिएशन प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव और जिलाध्यक्ष ने कहा कि शासन-प्रशासन, जिस प्रकार से ऑनलाइन उपस्थिति पर जोर लगा रहा है, उससे प्रतीत होता है कि उन्हें अपने अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। विद्यालय के निरीक्षण के लिए पांच स्तर संकुल, ब्लॉक, जिला, संभाग व प्रदेश स्तर पर अधिकारी चिन्हांकित हैं। उनके निरीक्षण व अवलोकन पर भरोसा क्यों नहीं? ऑनलाइन जानकारी से डेटा में सुधार तो दिखाई दे सकता है, लेकिन केवल डेटा सुधार से शैक्षिक गुणवत्ता की अपेक्षा नहीं किया जा सकती। ऑनलाइन उपस्थिति के नाम से शिक्षकों में भय का माहौल पैदा करने के बजाय शैक्षिक गुणवत्ता के लिए उन्हें प्रोत्साहन व सपोर्ट करने की आवश्यकता है।स्कूल के पहले ही दिन शिक्षक अन्य आवश्यक कार्य छोड़कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में घंटों लगे रहे, जिन शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई, वे जून माह की वेतन रुकने के नाम से भयभीत हैं। टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न होने पर शिक्षकों के जून माह का वेतन रोकने संबंधी आदेश को तत्काल वापस लेकर प्रत्येक स्कूल को इसके लिए संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।

बच्चे गर्मी से हो रहे परेशान
वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी व बिजली की आंख मिचौली से बच्चे परेशान नजर आए। कई स्कूलों में जल स्तर नीचे चले जाने से पानी की कमी के कारण बेचैन रहे। शासन-प्रशासन को स्कूलों में मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए पांचवी-आठवीं की अंकसूची के बगैर प्रवेश भी प्रभावित हुआ। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि कक्षा पांचवीं व आठवीं की जिला स्तर पर केंद्रीकृत परीक्षा आयोजित किया गया, जिसका आधे-अधूरे परीक्षा परिणाम विगत अप्रैल में घोषित किया गया। अब नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हो गया है, लेकिन पांचवी व आठवीं की अंकसूची बच्चों को अब तक नहीं मिल पाया है। अंकसूची नहीं मिलने के कारण छठवीं व नवमीं कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। शासन प्रशासन को ऑनलाइन उपस्थिति पर जोर लगाने के बजाय इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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