० कमिश्नर ने कलेक्टर को कार्रवाई के लिए भेजा पत्र
० कमिश्नर से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले में दो पंचायत सचिव ग्राम पंचायतों के करोड़ों रुपए डकार गए। इन सचिवों ने विकास एवं निर्माण कार्य सिर्फ कागजों पर ही दिखाया है। मामले की शिकायत बस्तर संभाग आयुक्त तक भी पहुंची, मगर जिला स्तर के कुछ अधिकारी दोनों सचिवों को बचाने में जी जान से जुटे हैं।
पूर्व सरकार के मंत्री के चहेते जनपद सीईओ के संरक्षण में कागजों पर विकास कार्यों को अंजाम देकर पंचायत के करोड़ों रूपये डकार जाने वाले एलमपल्ली एवं गुमोड़ी के पूर्व सचिव को अफसर भी बचाने में जुटे हैं। इसके अलावा बंडा, मेहता, मुकरम एवं दुलेड़ पंचायतों की जांच फाईलें भी बंद पड़ी हैं। एलमपल्ली ग्राम पंचायत के सचिव गिरीश कश्यप और गुमोड़ी सचिव बुधराम बारसे के खिलाफ शिकायत कमिश्नर बस्तर से 6 माह पूर्व की गई थी, लेकिन मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ता द्वारा कमिश्नर से पुछे जाने पर हर बार जवाब दिया जाता है कि कलेक्टर सुकमा को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा चुका है आप कलेक्टर से बात कर सकते हैं। कलेक्टर से पुछे जाने पर वे कहते मामले को चेक करवाता हूं। इससे साफ झलकता है कि अफसरों में आपसी सामंजस्य नहीं होने के कारण मामला फाईलों में दबा हुआ है। वहीं अधिकारी सुशासन त्यौहार की बात कर सरकार को भी गुमराह करने में जुटे हैं। जिसका खामियाजा चुनाव के समय सत्तारूढ़ भाजपा को भुगतना पड़ सकता है।ज्ञातव्य हो कि कांग्रेस के सरकार में सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड में वर्ष 2021 से 2023 के बीच आधा दर्जन से अधिक पंचायतों में कागजों पर विकास कार्यो को अंजाम देकर करोड़ों की बंदरबांट की गई थी। कमीशन सुकमा से लेकर राजधानी तक पहुंची थी। इस वजह से ऐसे भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं। कुछ अधिकारी जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वह अंगद की तरह वर्षों से जमे हुए हैं और अब यही अधिकारी भाजपा नेता के करीबी बन गए हैं।
जांच में करोड़ों के गबन का खुलासा
एलमपल्ली के पूर्व सचिव गिरीश कश्यप और गुमोड़ी के पूर्व सचिव बुधराम बारसे पर पंचायत के एक-एक करोड़ से अधिक के गबन का खुलासा जांच में हुआ था। जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम से राशि आहरण कागजों में तालाब निर्माण, हैण्डपंप, खनन एवं अन्य कार्यों की राशि के गबन के आरोप लगे हैं। दो का निलंबन किया जा चुका है।निलंबन के एक वर्ष बाद भी एफआईआर सहित अन्य कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कार्रवाई की मांग को लेकर बस्तर कमिश्नर से 6 माह पूर्व शिकायत की गई थी। फिर भी कार्रवाई शून्य है। वहीं अन्य कई पंचायतों का जांच मामला फाईलों में बंद है। बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह से मामले के संबंध में पुछे जाने पर उन्होंने बताया कि कार्रवाई के लिए कलेक्टर सुकमा को पत्र भेजा जा चुका है। वहीं सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मामले में निलंबन की कार्रवाई हुई है आगे क्या कार्रवाई की गई है इसे को चेक करवाता हूं। वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत से एक ही जवाब दिया जाता है कि मामला प्रक्रियाधीन है।
रिकवरी की भी कोशिश नहीं
नियमों के अनुसार निलंबित कर्मचारियों की जांच 90 दिनों में पूरा करने का प्रावधान है। जांच पूरी नहीं होने पर निलंबन अवधि बढ़ाई जा सकती है। विभागीय जांच में दोषी जाए जाने पर गबन की राशि वसूली के लिए नोटिस जारी करने के साथ ही एफआईआर दर्ज कराने का भी प्रावधान है। लेकिन सुकमा में नियम कुछ और ही चलता है। निलंबन के एक वर्ष बाद भी न तो रिकवरी के प्रयास हुए और न ही एफआईआर दर्ज कराई गई। जिम्मेदार अधिकारी जांच प्रक्रिया में रहने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते आ रहे हैं।