तीन मजदूरों की मौत के बाद जागा बीएसपी प्रशासन, जिम्मेदार साइट इंजीनियर पर कार्रवाई कब?

०  इंजीनियर नहीं रहते थे साइट पर मौजूद 
(अर्जुन झा)दल्ली राजहरा। नगर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद आखिरकार बीएसपी प्रबंधन हरकत में आया। बीएसपी प्रबंधन के जीएम इंचार्ज एचआर जेएन ठाकुर एवं मुख्य महाप्रबंधक आरबी गहरवार, विधयाक अनिला भेड़िया, नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू, उपाध्यक्ष मनोज दुबे, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक एसडीएम सुरेश कुमार साहू की मौजूदगी में अंतिम संस्कार के लिए तीनों मृतक परिवारों को 50-50 हजार रुपए की तत्कालिक सहायता राशि सौंपी गई। कुल 18 लाख रुपए मुआवजे पर सहमति बनी है। इसके अलावा ठेका कंपनी के अधीन आश्रित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन भी बीएसपी की ओर से दिया गया है। परिजनों ने डीएमएफ से अतिरिक्त सहायता राशि की मांग करते हुए प्रत्येक परिवार को 2-2 लाख रुपए देने की मांग रखी है। जिला प्रशासन ने भी हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने आयरन ओर माइंस टाउनशिप के डीजीएम मंगेश सेलकर और एजीएम टाउन सर्विसेस रमेश कुमार हेड़ऊ को सस्पेंड कर दिया है। बुधवार सुबह दोनों अधिकारियों को निलंबन पत्र सौंप दिया गया। जबकि सीवर लाइन निर्माण कार्य के साइट इंजीनियर रेवाराम पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है। इस कार्य को कराने की पूरी जिम्मेदारी साइट इंजीनियर रेवाराम पर ही थी। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि इंजीनियर रेवा राम कभी साइट पर नजर नहीं आते थे। अगर वे मौके पर रहते और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मापदंडों के साथ सीवर लाइन की खोदाई करवाते तो शायद यह दर्दनाक हादसा नहीं होता।

जनप्रतिनिधियों की पहल से मिली राहत
ज्ञात हो कि घटना स्थल पर सांसद भोजराज नाग के आने के बाद ही बीएसपी प्रशासन एवं अधिकारी हरकत में आए, तीनो शवों के बरामद होने के बाद ही वे घटना स्थल से प्रस्थान किए। इस दौरान नगर पालिका उपाध्यक्ष मनोज दुबे, पार्षद संजीव सिंह, बीएमएस से मुश्ताक अहमद, भाजपा मंडल अध्यक्ष रामेश्वर साहू, स्वाधीन जैन, अजयन पिल्लई, पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने मौके पर पहुंच कर बचाव दल के साथ कार्य करते हुए शव निकालने में मदद की। साथ ही प्रशासन से समन्वय स्थापित कर मृतकों के परिवार को हर संभव सहायता दिलाने में अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, विधयाक अनिला भेड़िया, नपा अध्यक्ष तोरण लाल साहू, उपाध्यक्ष मनोज दुबे जनपद सदस्य नीलिमा श्याम, संजय बैस, श्याम जयसवाल एवं अन्य सामाजिक एवं जनप्रतिनिधि ने पूरा सहयोग किया।

अभी भी खड़ा है सवाल
लेकिन बड़ा सवाल अब भी वही है कि आखिर तीन मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन है? बताया जा रहा है कि बीएसपी की सीवरेज लाइन बिछाने के लिए करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में पाइप डालने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान पाइप नीचे उतारने में उपयोग हो रही चेन मोल्डिंग अचानक टूट गई, जिससे गड्ढे की कमजोर मिट्टी भरभराकर धंस गई। एक मजदूर किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन अंदर कार्य कर रहे तीन मजदूर मलबे में दब गए। घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि बीएसपी प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बनकर सामने आया है। नगर के अंदर बीएसपी द्वारा कई स्थानों पर विकास कार्य चलाए जा रहे हैं। कहीं सड़क खोदी जा रही है, कहीं पाइप लाइन डाली जा रही है, तो कहीं विद्युत कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। साइट इंजीनियर मौके पर नजर नहीं आते। सारे कार्य ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिए गए हैं। सीवर लाइन के साइट इंजीनियर रेवा राम की लापरवाही खुलकर सामने आई है, मगर बीएसपी प्रबंधन उन पर मेहरबान बना हुआ है। कार्य स्थलों पर ना पर्याप्त बैरिकेडिंग होती है, न चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं और न ही आम लोगों को जानकारी दी जाती है कि आगे निर्माण कार्य चल रहा है। जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां लगातार लोगों की आवाजाही रहती है, इसके बावजूद सड़क के दोनों तरफ किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
जानकारी के अनुसार पाइप लाइन डालने और गड्ढा खोदने का कार्य एक ही मशीन से किया जा रहा था और मशीन में खराबी होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बीएसपी ने ठेका देने से पहले ठेकेदार और मशीनों की नियमित जांच की थी या नहीं? क्या यह सुनिश्चित किया गया था कि कार्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है? घटना के बाद स्थानीय लोगों और नगर पालिका की मदद से राहत कार्य शुरू हुआ, जबकि बीएसपी प्रबंधन की ओर से मशीन और संसाधन उपलब्ध कराने में काफी देरी हुई। लोगों का आरोप है कि यदि समय पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते तो शायद मजदूरों की जान बच सकती थी। बीएसपी हर वर्ष सुरक्षा सप्ताह मनाता है, बड़े-बड़े बैनर लगाकर सुरक्षा का संदेश देता है, लेकिन जमीन पर हालात इसके ठीक उलट दिखाई देते हैं। माइंस क्षेत्र के अंदर भी कई बार ठेका श्रमिक और कर्मचारी बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम करते नजर आते हैं।

जीत गुहा नियोगी ने साधा निशाना
इस पूरे मामले में जन मुक्ति मोर्चा के प्रमुख जीत गुहा नियोगी ने बीएसपी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दल्ली राजहरा में मजदूरों का शोषण वर्षों से जारी है और यह हादसा उसी लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि लगातार विरोध प्रदर्शन और दबाव के बाद ही बीएसपी प्रबंधन मृतक परिवारों को उचित मुआवजा और नौकरी देने पर राजी हुआ।
उन्होंने मांग की है कि इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और नगर में चल रहे सभी निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। यह घटना केवल तीन मजदूरों की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही को उजागर करती है। अब सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहेगी या भविष्य में मजदूरों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम भी उठाए जाएंगे? इस मामले में साइट इंजीनियर रेवा राम की भूमिका को संदिग्ध बताया जा रहा है कि ये लोग साइट नहीं जाकर केवल ठेकेदार भरोसे चलते है। अगर ये मौके पर रहते तो शायद ऐसी घटना नहीं होती।

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