गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग, बस्तर की सभी तहसीलों में सौंपा गया ज्ञापन

0 गौमाता को सम्मान दिलाने आगे आए गौभक्त 
जगदलपुर। देश की सांस्कृतिक आत्मा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार गौवंश को उचित संवैधानिक दर्जा दिलाने हेतु आज बस्तर जिले में ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, गौ सेवकों और संत समाज ने एकजुट होकर शोभायात्रा निकालते हुए बस्तर जिले की सात तहसीलों जगदलपुर, तोकापाल, बस्तर, बकावंड, नानगुर, बास्तानार और भानपुरी में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम प्रेषित किया गया है। ज्ञापन देश की समस्त तहसीलो में दिया गया।

​इस विस्तृत ज्ञापन के माध्यम से बस्तर के गौ भक्तों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि गौवंश को वह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हो, जिसकी वह सदियों से हकदार है। ज्ञापन में प्रमुखता से मांग की गई है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 और 51 A (जी) की मूल भावनाओं के अनुरूप केंद्र सरकार संसद में आवश्यक संशोधन कर देशी गौवंश को ‘राष्ट्रमाता’ का आधिकारिक दर्जा प्रदान करे। साथ ही, राज्य सरकार से यह आग्रह किया गया है कि वह विधानसभा में विशेष संकल्प पारित कर छत्तीसगढ़ में गौमाता को ‘राज्य माता’ घोषित करें और ‘गौ आधारित अर्थव्यवस्था’ को सशक्त बनाने हेतु ठोस नीतिगत निर्णय लें। ​ज्ञापन में वर्तमान परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि आधुनिकता की होड़ में पूजनीय गौवंश आज सड़कों पर असुरक्षित है और पॉलीथिन खाने को विवश है, जो हमारी ‘छत्तीसगढ़िया अस्मिता’ और सनातन मूल्यों पर एक गहरा आघात है। इस समस्या के समाधान हेतु एक एकीकृत केंद्रीय गौ सेवा अधिनियम बनाने, गौ तस्करी को गैर जमानती अपराध घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति राजसात करने जैसे कड़े प्रावधानों की मांग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की गई है। साथ ही, राज्यपाल और मुख्यमंत्री से राज्य की हर ग्राम पंचायत में नंदीशाला तथा जिला स्तर पर आदर्श गौ अभयारण्य विकसित करने का निवेदन किया गया है। गौ सेवकों ने आगे कहा कि यदि छत्तीसगढ़ को रसायनों के बोझ से मुक्त कर पुनः समृद्ध ‘धान का कटोरा’ बनाना है, तो गौ आधारित प्राकृतिक कृषि को एकमात्र मार्ग बनाना होगा। इसके लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में गौ विज्ञान शामिल करने और गौ उत्पादों के लिए पृथक विपणन व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह अभियान पूरी तरह से निःस्वार्थ और अहिंसक है, जिसमें बस्तर की जनता ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अपना संरक्षक मानते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि उनके नेतृत्व में गौमाता को न्याय मिलेगा और भारत पुनः विश्व गुरु के पद पर प्रतिष्ठित होगा। ज्ञापन देने के दौरान बड़ी संख्या में गौभक्त, विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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