0 शहर को 25 दिन बाद भी नहीं मिल रहा रसोई गैस, ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की समय सीमा क्यों?
रायपुर। रसोई गैस संकट पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि रसोई गैस की कोई कमी नही है, फिर शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस के लिए जनता लाईन में क्यों खड़ी है? 25 दिन की समय सीमा तय लेकिन 30 दिन बाद भी रसोई गैस की आपूर्ति क्यों नही हो रही है? शहरी क्षेत्रों को 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों को 45 दिन बाद दोबारा रसोई गैस की समय सीमा क्यों? ये भेदभाव क्यों? रसोई गैस की कमी नहीं फिर कई गैस एजेंसियां में ताला क्यों लगा है? जनता विरोध प्रदर्शन क्यों कर रही है? विवाद हो रहा है? ग्रामीण क्षेत्रों में भी पूरा खाना रसोई गैस से बनता है, एक सिलेंडर 25-से 28 दिन में खत्म हो जा रहे है ऐसे में सिलेंडर खत्म होने के बाद ग्रामीण भोजन किसमें बनाये? लकड़ी वैसे ही नहीं मिल रहा है? धुंआ के चलते अब चूल्हा में खाना बनाना भी लगभग बंद हो चुका है? सरकार खुद मानती है चूल्हा में खाना बनाने से धुआं के कारण महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होता है फिर रसोई गैस क्यों नहीं दिया जा रहा है?
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि रसोई गैस की दुबारा रिफलिंग में 25 दिन और 45 दिन की समय सीमा समाप्त कर पूर्व की तरह 21 दिन किया जाये। रसोई गैस की कालाबाजारी रोकने में सरकार असफल हो चुकी है, इसे कड़ाई से रोका जाये। उज्जवला योजना के लाखों हितग्राहियों को केवाईसी के नाम से रसोई गैस सिलेंडर नहीं दिया गया, उन्हें तत्काल रसोई गैस उपलब्ध करवाया जाये। रसोई गैस की कमी के चलते वैकल्पिक ईंधन के रूप मिट्टी तेल की आपूर्ति देने की व्यवस्था की बात कही गई थी लेकिन मिट्टी तेल नहीं मिल रहा है। रसोई गैस की कमी पर सरकार सिर्फ हवा हवाई दावा कर रही है जो धरातल पर दिखता नहीं है। सरकार जिम्मेदार से व्यवस्था सुधारें, जनता को बिना परेशानी रसोई गैस मिले ये सुनिश्चित किया जाये। गैस एजेंसियों में उपभोक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, विवाद किया जा रहा है। ऐसे एजेंसियों पर कड़ी कार्यवाही हो। कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति में बाधा दूर किया जाये।