रामकृष्ण हॉस्पिटल सीवर हादसा, जिम्मेदार प्रबंधन, निगम आयुक्त और मुख्य अभियंता पर अब कार्यवाही क्यों नहीं हुई – धनंजय सिंह

0 सरकार ने सीवर हादसा रोकने नियम बनाये, अब खुद पालन नहीं कर रही, रामकृष्ण हॉस्पिटल हादसा के जिम्मेदारों को बचा रही

रायपुर। रामकृष्ण हॉस्पिटल सीवर कांड के लिए जिम्मेदारों पर अब तक कार्यवाही नहीं होने पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि रामकृष्ण हॉस्पिटल सीवर टैंक की मैनुअल सफाई के कारण तीनों लोगों की मौत हो गई। ये घटना सरकार की लापरवाही से हुआ है। रामकृष्ण हास्पिटल घटना के पहले अशोका बिरयानी एवं गुड़ाखु कम्पनी में भी सफाई के दौरान श्रमिको की मौत हुई, उसके बावजूद सरकार ने घटनाओं को रोकने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रबंधन निगम आयुक्त एवं मुख्य अभियंता पर कोई कार्यवाही नहीं किया। जबकि इस प्रकार से सीवर हादसा को रोकने सरकार ने 2022 में ही तय कर दिया कि अगर सीवर सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान कोई हादसा होगा तो ठेकेदार, प्रबंधन, निगम आयुक्त एवं निगम के मुख्य अभियंता जिम्मेदार होंगे। फिर अब तक रामकृष्ण हॉस्पिटल कांड पर प्रबंधन, निगम आयुक्त एवं निगम के मुख्य अभियंता के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की गई? सरकार खुद नियम बनाती है, जिम्मेदारियां तय करती भी खुद जिम्मेदारी से क्यां भाग रही है?

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में लगातार हो रही सीवर/सेप्टिक टैंक में मौतों ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की सरकार पूरी तरह संवेदनहीन और विफल हो चुकी है। ये घटनाएं दुर्घटना नहीं बल्कि “सरकारी हत्या” हैं, जिनकी सीधी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार पर बनती है। क्या भाजपा सरकार में सफाई कर्मियों की जीवन का कोई मोल नहीं है। रामकृष्ण हॉस्पिटल में सीवर की सफाई को मैनुअल करवाना माननीय न्यायालय एवं केंद्र सरकार के निर्देशों का सीधा-सीधा उल्लंघन है। स्पष्ट निर्देश है कि सीवर एवं सेप्टिक टैंकों की सफाई मशीन से होगी, इसकी जिम्मेदारी नगर निगम की है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में “ठेकेदार-प्रशासन गठजोड़” के चलते मजदूरों की जिंदगी सस्ती हो गई है। मशीनों की जगह इंसानों को उतारना, सुरक्षा किट तक उपलब्ध न कराना, यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध है। उन्होंने कहा कि 2022 में केंद्र ने सीवर सफाई को पूरी तरह मशीनी बनाने और “जीरो फेटलिटी” का लक्ष्य रखा, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की नीयत ही साफ नहीं है। यहां नियम सिर्फ कागजों में हैं और जमीन पर मौत का खेल जारी है।

 

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