रायपुर। देश में 25 जून, 1975 को लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर भाजपा जहां इसे संविधान हत्या दिवस के रूप में मना रही है, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा है कि देश आज 2.5 साल के घोषित आपातकाल नहीं, बल्कि 11 साल से चल रहे अघोषित आपातकाल की चपेट में है।
रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बघेल ने कहा इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लागू की थी, लेकिन वह संविधान के तहत और खुले रूप में थी। उन्होंने खुद चुनाव कराया, हार स्वीकार की और सत्ता छोड़ी। लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार लोकतंत्र को दबाने के लिए 11 साल से अघोषित आपातकाल चला रही है, जिसकी कोई समयसीमा नहीं दिखती।
अबकी बार 400 पार का नारा, संविधान बदलने की मंशा
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का अबकी बार 400 पार का नारा, संविधान में बदलाव की मंशा से जुड़ा है। उन्होंने कहा आज नेता, मीडिया, उद्योगपति—हर किसी को दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रेस की स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है। यदि कोई मीडिया हाउस सरकार के खिलाफ कुछ दिखाता है तो वहां ED, IT और CBI की टीमें भेज दी जाती हैं।
बघेल ने NDTV, Dainik Bhaskar, BBC Hindi, The Wire, Newsclick, Bharat Samachar सहित कई मीडिया संस्थानों पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि यह सब बिना इमरजेंसी घोषित किए हो रहा है।
न्यायपालिका और विश्वविद्यालयों पर भी नियंत्रण
बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि देश की न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा रहा है और विश्वविद्यालयों में RSS से जुड़े लोगों की नियुक्तियाँ की जा रही हैं। उन्होंने कहा पहले उद्योगपति सरकार के सामने खुलकर अपनी बात रखते थे, लेकिन अब उद्योग और मीडिया दोनों को नियंत्रित किया जा रहा है।
CBI, ED की कार्रवाई से विपक्ष को डराया जा रहा
कांग्रेस नेता ने कहा जो भी भाजपा में शामिल हो जाता है, वह वॉशिंग मशीन’ से धुलकर पाक-साफ हो जाता है। लेकिन विपक्ष के नेताओं को एजेंसियों के ज़रिए परेशान किया जा रहा है। ये लोकतंत्र नहीं, दमन का दौर है।
अरुण साव को घेरा, आदिवासियों के पलायन का मुद्दा उठाया
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए बघेल ने कहा, आपातकाल उस समय राष्ट्रपति के अध्यादेश और संसद की स्वीकृति से लागू हुआ था। लेकिन आज तो कोई औपचारिकता नहीं है, बस दमन है। आदिवासी इलाकों में पुलिसिया डर के चलते हजारों लोग पलायन कर गए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि पिछले डेढ़ साल में NIA ने छत्तीसगढ़ में कितने प्रकरण दर्ज किए और कितनी गिरफ्तारियां कीं? सरकार आदिवासियों पर कार्रवाई कर रही है, जिससे तीन ज़िलों के 30 से 40 हजार लोग डर के कारण प्रदेश छोड़ चुके हैं। यह स्थिति 1975 के आपातकाल से भी भयावह है।