छग-उड़ीसा की जीवनरेखा ध्वस्त, सालभर से धराशायी हालत में है पुल

०  टूटे पुल के साथ टूटा सिस्टम के प्रति भरोसा 
०  पटियावंड–मोतीगांव मार्ग पर आवागमन बाधित 
(अर्जुन झा) बकावंड। निर्माण में अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही ने विकासखंड बकावंड और उड़ीसा के पचासों गांवों के ग्रामीणों को मुसीबत में डाल दिया है। नदी पर लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाया गया पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। पुल पर से आवागमन बाधित हो गया है। ग्रामीण पुल के नीचे से नदी से होकर सफर कर रहे हैं। यह सफर भी बड़ा जोखिम भरा होता है। बरसात के मौसम में दर्जनों गांवों के लोग आपने अपने गांव में ही कैद होकर रह जाएंगे।
बकावंड विकासखंड के ग्राम पटियावंड से उड़ीसा के मोतीगांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित पुल पिछले एक वर्ष से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। छत्तीसगढ़ और उड़ीसा सीमा क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले इस पुल और मार्ग की बदहाली ने ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। हैरानी की बात यह है कि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक अधिकारी अब तक इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटने के बाद से क्षेत्र के लोगों को जान जोखिम में डालकर नाले के नीचे से पैदल, साइकिल और मोटर साइकिल के माध्यम से आवागमन करना पड़ रहा है। कई बार वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार होते-होते बचे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है और न ही पुल की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मार्ग केवल पटियावंड और मोतीगांव को ही नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ता है। इस रास्ते से प्रतिदिन विद्यार्थी स्कूल और कॉलेज पहुंचते हैं, मरीज उपचार के लिए अस्पताल जाते हैं तथा ग्रामीण अपने दैनिक कार्यों के लिए आवाजाही करते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण इन सभी गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।अब जबकि मानसून दस्तक देने वाला है, ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। बारिश शुरू होते ही इस छोटी नदी का जलस्तर बढ़ जाएगा और ऐसे में इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह बंद होने की आशंका है। यदि समय रहते पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो पटियावंड, मोतीगांव सहित आसपास के कई गांवों का संपर्क कट सकता है। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन वितरण और रोजगार पर पड़ेगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। लोगों में प्रशासनिक उदासीनता को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ सरकार, उड़ीसा सरकार, बस्तर जिला प्रशासन तथा लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि तत्काल स्थल का निरीक्षण कर पुलिया के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू कराया जाए, ताकि बरसात के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि की स्थिति उत्पन्न न हो।

ग्रामीणों का सवाल है क्षेत्र के ग्रामीण पूछ रहे हैं क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? आखिर एक वर्ष से टूटी पड़ी इस महत्वपूर्ण पुलिया की सुध कब ली जाएगी?ग्रामीणों का कहना है कि एक साल से टूटा है पुल बरसात से पहले भी नहीं जागा प्रशासन। सीमा क्षेत्र की जीवनरेखा बदहाल, पटियावंड–मोतीगांव मार्ग पर संकट के बादल छा गए हैं। टूटे पुल से ग्रामीणों को रोज खतरे के साये में सफर करना पड़ता है। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की उदासीनता को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बरसात में कट सकता है दर्जनों गांवों का संपर्क।

तुरंत करेंगे सुधार
तुरंत पता कर प्रारंभिक रूप से क्या सुधार हो सकता है, उसे पूरा करने प्रयत्न करता हूं, बाकी कार्य उच्च अधिकारी से संपर्क कर पूरा करेंगे
-राजेश कुमार,
एसडीओ, लोक निर्माण विभाग

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