0 सीजीटीए के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण ने की कल की रैली में शामिल होने की अपील
0 25 को शिक्षकों की विशाल टेट मुक्ति रैली
जगदलपुर। टीईटी के खिलाफ शिक्षकों ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। इसी के तहत 25 अगस्त को प्रदेश भर के शिक्षक टेट मुक्ति रैली निकालने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन (सीजीटीए) के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव ने प्रदेश के शिक्षकों से कहा है कि 25 अगस्त की टेट मुक्ति रैली शिक्षकों की एकता का एक बड़ा संकेत है। इसे आप लगातार बोलते रहे, इस विषय को ध्यान में रखते हुए पहल की गई। यह रैली आगे की और लड़ाई के लिए एकता की मिसाल बनेगी, इसलिए आपको भी सोच समझ कर, चिंतन कर, शिक्षक संवर्ग के भेद से ऊपर उठकर आगे आना होगा।
प्रवीण श्रीवास्तव ने कहा कि हम उन साथियों की बात करें, जो 17 अगस्त 2012 के पहले नियुक्त हुए हैं, जिनकी भर्ती और पदोन्नति नियम में टेट की अनिवार्यता ही नहीं है, वर्तमान में भी 31 अगस्त 2028 तक का समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है। ऐसी स्थिति में भी शिक्षकों पर टेट का भयादोहन, टीईटी के आधार पर ही पदोन्नति, टीईटी के बिना सेवा समाप्ति जैसे विषय सामने आ रहे हैं। इसका हम सब पुरजोर विरोध करते हैं। हमारे लिए शिक्षकों की सुरक्षित सेवा सर्वोपरि है। उन साथियों को विशेष रूप से समझना होगा जो प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में सेवारत हैं। प्रधान पाठक और व्याख्याता साथियों की भी 25 अगस्त की रैली में शामिल होने की महति आवश्यकता है।
सीजी टीए के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव ने आगे कहा है- कल्पना कीजिए की सेवा के बाद रिटायर होने पर आपको कितनी पेंशन मिलेगी? आप कैसे गुजर बसर करेंगे? आपके दवाइयों का इंतजाम कैसे होगा? क्योंकि 2018 से पेंशन लागू है, 2028 के पहले जो रिटायर हो रहे है उन्हें जीरो पेंशन और 2028 के बाद आप रिटायर होंगे तो आपको भी आंशिक पेंशन मिलेगी, यह भी संघर्ष करने की मूल वजह है। छत्तीसगढ़ में सभी संवर्ग का वेतनमान तय कर दिया गया है, तदनुसार हमे वेतन मिल रहा है, लेकिन 1998 से 2018 तक की हमारी सेवाएं शासकीय मान्य नही किया गया है जिसके कारण सभी संवर्गों के वेतन में विसंगति है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों के लिए राज्य सरकार को भी केंद्रीय वेतनमान लागू किया जाना चाहिए यह हमारी मूल भावना है। 13 फरवरी 2026 का नया भर्ती एवं पदोन्नति नियम लागू किया गया है, इसमें शिक्षकों की अधिकारों की पूरी पूरी कटौती की गई है। ऐसा लगता है कि शिक्षा विभाग को बाहर के लोग संचालित करेंगे। शिक्षक और प्रधान पाठक को एबीओ बनाया जा सकता है, व्याख्याता और प्राचार्य को बीईओ बनाया जा सकता है, प्राचार्य को उप संचालक में पदोन्नति दी जा सकती है, यह पूर्व में प्रावधानित नियम थे, जिन्हें बदलकर पूरे-पूरे शिक्षक संवर्गों की सेवा को दरकिनार किया जा रहा है। यह अत्यंत निराशाजनक है कि जहां पर शिक्षक व व्याख्याता के लिए बीएड की डिग्री को अनिवार्य किया जा रहा है उनके अवलोकन के लिए एबीओ और बीईओ को प्रशिक्षण की आवश्यकता ही नहीं है, ऐसे नियम का पूरी तरह हम विरोध करते हैं। आने वाले समय में हमारे शिक्षक साथियों को बीएड की अनिवार्यता होगी, ऐसे में शिक्षकों को सेवा में रहते हुए बीएड कराना शासन के लिए भी उपयोगी नहीं है और शिक्षकों के लिए भी व्यवहारिक नहीं है, इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमने बीएड प्रशिक्षण को ब्रिज कोर्स के रूप में कराने हेतु शिक्षा विभाग से व्यापक चर्चा किया है, उम्मीद किया जाना चाहिए कि आने वाले समय में इसके सुखद परिणाम निकलेंगे।
श्री श्रीवास्तव ने शिक्षकों को आगाह किया है कि किसी को बोलने – बरगलाने की आवश्यकता नहीं है, हमारे शिक्षक संवर्ग में 8 सालों पहले एक वर्ग भेद पैदा हुआ, किन्तु इन 8 वर्षों में जिसके लिए कार्य करने लोग बढ़े वह अपेक्षित परिणाम नहीं दिला पाए, हम वर्षों से एक साथ काम करते थे जिससे शासन से कुछ न कुछ हमको मिलता रहा, यह स्थिति लंबे समय तक बनी और आज 8 वर्षों में हम सबको कुछ नहीं मिला। छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने डॉ. आलोक शुक्ला तत्कालीन प्रमुख सचिव शिक्षा से बुद्धिमत्ता पूर्ण, तार्किक व तथ्यात्मक चर्चा करते हुए वन टाइम रिलैक्सेशन के तहत 30 हजार शिक्षकों की पदोन्नति कराने में सफलता पाई। 25 अगस्त हम सबके लिए एक बड़ा अवसर है कि इस शंखनाद “टेट मुक्ति रैली” में शामिल हों और समस्त शिक्षक एकता का परिचय देते हुए जो उक्त पांच बिंदु के मुख्य मांगे हैं उन पर हम सब विचार करें कि इन बिंदुओं में कहीं न कहीं हम सभी की मांग शामिल होते हैं। सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधान पाठक, व्याख्याता या प्राचार्य हो सबको अपने लिए शामिल होकर आहुति देनी होगी, तभी जाकर शिक्षक संवर्गों का हित इस शासन में आगे जाकर सधेगा।