0 फरसपाल के दशपाल घाट पर फिर दिखा बाघ
0 बुलेंस के ईएमटी और पायलेट ने ली तस्वीर
(अर्जुन झा) जगदलपुर। नक्सलियों मुक्त हो चुके बस्तर के जंगलों में अब वन्य प्राणी उन्मुक्त होकर विचरण करने लगे हैं। तेंदुओं और भालुओं के बाद अब बस्तर के जंगलों में बाघ की भी मौजूदगी की सुखद खबर सामने आई है।
बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के जंगलों में बाघ की मौजूदगी अब बस्तर को नई पहचान दिला सकती है। सोमवार 3 जुलाई को सुबह कुटरू मंगापेटा सड़क पर बाघ नजर आया था। उस वक्त भी 108 के पायलट व ईएमटी ने देख कर उसका वीडियो बनाया था। शनिवार रात 9.30 के लगभग फरसपाल सड़क पर दशपाल के समीप सड़क फिर एक खूबसूरत बाघ खड़ा नजर आया। एंबुलेंस पायलट रमेश व ईएमटी श्रीनिवास तोगर ने बताया कि भैरमगढ़ से 108 एंबुलेंस लेकर वे प्रसव पीड़ा झेल रही दशापाल की एक गर्भवती महिला को लेकर आ रहे थे। इसी दौरान रात करीब 9.30 बजे सड़क पर बाघ बैठा नजर आया। एंबुलेंस के करीब पहुंचने पर बाघ खड़ा हो गया और एंबुलेंस की ओर आने लगा दिखा। पॉयलट और ईएमटी ने बाघ की तस्वीर को अपने मोबइल फोन के कैमरे में कैद कर लिया। गांव के आसपास बाघ के दिखने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वे अपनर पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उल्लेखनीय है कि नक्सल समस्या के चलते बस्तर के जंगलों में आएदिन बमों के धमाके और बंदूकों की गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजती रहती थी। इन हालातों ने जंगली जानवरों को पलायन करने और कंदराओं तथा गुफाओं में छुपे रहने के लिए मजबूर कर दिया था। जबसे नक्सली समस्या खत्म होने के बाद शांत हो चले यहां के जंगलों में रौनक फिर से लौट आई है। हिरणों, चीतलों, बारहसिंघों, सियारों, जंगली सूअरों, तेंदुओं, भालुओं और बाघों की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। हाल ही में कांकेर जिले में एक मादा भालू ने दो ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें मार डाला था। कुछ माह पहले जगदलपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव के खेत में तेंदुए ने एक गाय का शिकार किया था। ये घटनाएं बताती हैं कि बस्तर के जंगल बायोडायवर्सिटी से फिर भर उठे हैं। तरह तरह के वन्य प्राणियों की उपस्थिति आबाद होते बस्तर के जंगलों की कहानी बयां कर रहे हैं। यह पर्यटन के लिहाज से भी शुभ संकेत है।