० उपेक्षित हालत में है बड़ेंग वॉटरफॉल
० पर्यटन विकास के लिए बरूंगपाल के ग्रामीणों की बेमिसाल पहल
० अपने संसाधन लगाकर ग्रामीण बना रहे हैं 6 किमी लंबी सड़क
(अर्जुन झा) जगदलपुर। शासन, प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो अपने गांव की पहचान को मिटने से बचाने का बीड़ा ग्राम पंचायत बरूंगपाल के ग्रामीणों ने उठा लिया है। पंचायत लगभग 150 ग्रामीणों ने लगातार दूसरे वर्ष भी सामूहिक श्रमदान कर बड़ेंग वॉटरफॉल तक पहुंचने वाले लगभग 6 किलोमीटर मार्ग का निर्माण एवं सुधार कार्य किया। इस कार्य में ग्रामीणों ने अपने निजी ट्रैक्टर, जेसीबी एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराकर जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।इससे पूर्व वर्ष 2025 में भी ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से सड़क निर्माण एवं सुधार कार्य किया था। उस समय प्रशासन द्वारा निरीक्षण भी किया गया था, किंतु ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद सड़क एवं पर्यटन स्थल के समुचित विकास के लिए अपेक्षित सरकारी पहल नहीं हो सकी। श्रमदान अभियान में ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। इनमें भूतपूर्व जिला पंचायत सदस्य रुक्मणी कर्मा, जनपद सदस्य भारती कर्मा, सरपंच सोमारी, समाजसेवी पाकलू कर्मा, हिरमो वट्टी, नरेंद्र कर्मा, पांडू बेट्टी, अर्जुन कर्मा, भीमो वट्टी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं।ग्रामीणों का कहना है कि पहले ग्राम पंचायतों को आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए नियमित रूप से निधि उपलब्ध कराई जाती थी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्य किए जाते थे। वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश कार्य प्रस्तावों एवं स्वीकृतियों पर निर्भर हो गए हैं, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों के आवश्यक विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि संसाधनों की कमी या अन्य कारणों से विकास कार्यों में अपेक्षित गति नहीं दिख रही है।
शासन से ग्रामीणों की गुहार
ग्रामीणों के अनुसार इस सड़क के पूर्ण रूप से विकसित होने पर कलेपाल की दूरी लगभग 8 किलोमीटर से घटकर 3 किलोमीटर रह जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा यह मार्ग एक महत्वपूर्ण शॉर्टकट के रूप में विकसित होगा। ग्रामीणों ने राज्य सरकार एवं प्रशासन से मांग की है कि बड़ेंग वॉटरफॉल को एक विकसित पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए सड़क का स्थायी निर्माण, एक मिनी डैम, पार्किंग, उद्यान, पर्यटक सुविधा परिसर, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का शीघ्र निर्माण कराया जाए। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे तथा बस्तर की प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।