गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग तेज, गोसेवकों ने निकाली रैली, सौंपा हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन

जगदलपुर। गौ सम्मान आह्वान अभियान के दूसरे चरण के तहत जगदलपुर में बड़ी संख्या में गोसेवकों, सनातन समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने रैली निकालकर गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठाई। रैली के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपा गया।

आयोजकों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य देशभर में गौ संरक्षण को बढ़ावा देना और गौ हत्या पर प्रभावी एवं समान कानून लागू कराने की मांग को सरकार तक पहुंचाना है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रैली में भाग लेकर अभियान के समर्थन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। अभियान के जिला प्रभारी दीपक पनपालिया ने बताया कि यह देशव्यापी, शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक जनअभियान है, जिसे देश के सैकड़ों जिलों में एक साथ चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर जिले से इस अभियान के समर्थन में करीब 1.25 लाख लोगों के हस्ताक्षर एकत्र किए गए हैं, जिन्हें ज्ञापन के साथ शासन तक भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकार से गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने तथा पूरे देश में गौ हत्या रोकने के लिए एक समान और प्रभावी कानून लागू करने की मांग की गई है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि अभियान का अगला चरण अक्टूबर माह में आयोजित किया जाएगा, जिसमें जनजागरण और हस्ताक्षर अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा। रैली में शामिल महापौर संजय पांडे ने कहा कि गौ सेवा और गौ संरक्षण भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रैली, मंत्रोच्चार और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गौ संरक्षण को सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व बताते हुए लोगों से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। शारदा पटेल ने भी नागरिकों से गौ संरक्षण के समर्थन में आगे आने और जनजागरण अभियान को मजबूत बनाने का आग्रह किया। रैली शांतिपूर्ण ढंग से शहर के विभिन्न मार्गों से होकर निकली और अंत में कलेक्टर परिसर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में गोसेवक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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