धर्मांतरण के लिए अमेरिका से फंडिग, मतांतरण रोकने में सरकार नाकाम – पूर्व विधायक मनीष कुंजाम

०  बैलाडीला में 3 लाख टन लौह अयस्क खनन और परिवहन में 100 करोड़ के घोटाले का आरोप 

जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले के कोंटा के पूर्व विधायक एवं बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक मनीष कुंजाम ने धर्मांतरण को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने दावा किया है कि बस्तर समेत पूरे देश के आदिवासी बहुल इलाकों में धर्मांतरण गतिविधियों के लिए अमेरिका से फंड आ रहा है। श्री कुंजाम ने बैलाडीला इलाके के अलनार क्षेत्र में आरती स्पंज द्वारा 3 लाख टन लौह अयस्क के उत्खनन एवं परिवहन के नाम पर निजी कंपनी और भाजपा नेताओं ने मिलीभगत कर 100 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा किया है। ऐसे फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ डबल इंजन वाली सरकार से कार्रवाई की उम्मीद नहीं किया जा सकती। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कम्युनिस्ट पार्टी से विधायक रहे मनीष कुंजाम ने कहा कि धर्मातंरण के लिए चर्चो और मिशनरियों को अमेरिका से फंडिंग हो रही है। इसे सरकार रोकने में नाकाम है।

पूर्व विधायक श्री कुंजाम ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि आरती स्पंज आयरन द्वारा अलनार क्षेत्र में लौह अयस्क उत्खनन परिवहन एवं बिक्री को लेकर 100 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा किया गया है। जबकि मौके पर किसी प्रकार से कोई उत्खनन कार्य नहीं कराया गया है। कार्रवाई की मांग को लेकर अलनार से दंतेवाड़ा तक ग्रामीणों ने पदयात्रा भी निकाली थी, लेकिन आज तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से सरकार की मिलीभगत होने का अंदेशा है।

श्री कुंजाम ने कहा कि चर्च के लोग धर्मातरण कराने का काम कर रहे हैं। इसके लिए बड़े पैमाने पर अमेरिका से फंडिंग हो रही है। जिसे भी सरकार रोकने में नाकाम साबित हो रही है। बोधघाट परियोजना के संबंध में उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं हैं। इससे आदिवासियों की संस्कृति नष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस दोनों विपक्ष में रहते परियोजना का विरोध करती रही है। सत्ताधारी दल जो पहले विरोध करती थी, वह अब इसका पक्षधार हो गया। लाल मिट्टी के डंप को लेकर उन्होंने कहा कि नेता एवं अधिकारी के संरक्षण में लाल जहर डंप किया जा रहा है जिसका विरोध करने पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

सुकमा में तेंदूपत्ता बोनस वितरण के संबंध में मनीष कुंजाम ने कहा कि दो वर्ष बाद भी 34 हजार संग्रहकों की बोनस राशि नहीं मिल पाई है। जबकि इस मामले में डीएफओ को जेल तक जानी पड़ी और कई प्रबंधकों की नौकरी से भी निकाला जा चुका है। उन गरीब आदिवासियों के पारिश्रमिक राशि भुगतान को लेकर सरकार को कोई कदम नहीं उठा रही है। पत्रकार वार्ता में संतोष यादव, रामा सोड़ी, बल्देव साहू उपस्थित रहे।

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