पर्यावरणप्रेमी वीरेंद्र गुप्ता आज भी जीवित हैं इन पेड़ों के रूप में!

0  गुप्ता के लगाए पेड़ शीतल छांव दे रहे हैं सैकड़ों ग्रामीणों को 
बकावंड। क्षेत्र के करपावंड के प्रतिष्ठित व्यवसायी और पर्यावरण प्रेमी वीरेंद्र गुप्ता भले ही शारीरिक रूप से इस दुनिया में नहीं हैं, मगर वे सैकड़ों पेड़ों के रूप में आज भी जीवित हैं। ये पेड़ आज हजारों लोगों सिर्फ प्राणवायु ही नहीं, बल्कि इस भीषण गर्मी में शीतल छांव भी दे रहे हैं।
वीरेंद्र गुप्ता प्रकृति, पर्यावरण के प्रति आजीवन समर्पित रहे। उनके द्वारा लगाए गए पौधे अब विशाल वृक्ष बनकर हजारों जीवों को प्राण वायु और ग्रामीणों को शीतल छांव दे रहे हैं। स्व. श्री गुप्ता ने अपने जीवन काल के दौरान बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया था। सड़कों के किनारे और बाजार स्थलों पर उनके द्वारा लगाए गए पौधे विशाल पेड़ों में तब्दील हो चुके हैं। बाजार में लगे छायादार पेड़ों की छांव तले बैठ कर दर्जनों गांवों के व्यवसायी व्यवसाय करते और अपने परिवारों का पालन पोषण करते हैं बकावंड ब्लाक के करपावंड में गुरूवार को साप्ताहिक बाजार में दर्जनों गांवों के सैकड़ों लोग दूर दूर से आते हैं। जिन्हें वीरेंद्र गुप्ता द्वारा लगाए गए छायादार पेड़ों के नीचे सुकून मिलता है।करपावंड के बाजार स्थल में पीपल, बरगद, नीम के पेड़ों से मिल रही छाया के नीचे बैठकर ग्रामीण और व्यापारी बाजार के दिन अपनी दुकान लगाते हैं और सामान की खरीदी, बिक्री होती है। यहां लगभग 25 साल पहले करपावंड बस्ती के व्यवसायी व समाजसेवी वीरेंद्र गुप्ता ने पौधे रोपित किए थे। समय के साथ-साथ ये पौधे विशाल वृक्ष बनकर सैकड़ों लोगों को छाया के साथ राहत पहुंचा रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमी श्री गुप्ता ने न केवल बाजार स्थल पर बल्कि स्कूल, बालक आश्रम, बैंक परिसर, थाना परिसर, मंदिर और तालाब के किनारे भी बरगद और पीपल के पेड़ 1992 से लगातार हर साल लगाते रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी लगन के चलते जहां वातावरण हराभरा नजर आता है वहीं सभी को पेड़ के नीचे छाया से राहत मिलती है। इस संवाददाता से चर्चा करते हुए गुप्ता परिवार के लोगों ने बताया कि 1992 में नवरात्र के समय देवी दुर्गा की स्थापना की गई थी। उसी समय से वीरेंद्र गुप्ता के मन में यह विचार आया कि पौधे लगाना पर्यावरण के लिए जरूरी है। इसलिए हर साल कहीं न कहीं पेड़ लगाने की सिलसिला उन्होंने शुरू कर दिया था।

श्री गुप्ता द्वारा लगाए गाए गए पौधे अब पेड़ बन हैं।बाजार के दिन सभी पेड़ के नीचे गांव-गांव से आने वाले लोग बैठकर धंधा करते हैं। खासकर गर्मी में पेड़ की छांव लोगों को सुकून देती है। इसे देखकर मन को शांति मिलती है और सालों पहले किए गए इस कार्य का प्रतिफल देखकर अच्छा लगता है। परिजनों ने कहा कि पेड़ लगाने से पर्यावरण की रक्षा होती और पेड़ से फल, फूल, छाया और ऑक्सीजन भी मिलती है जो हर किसी के लिए जरूरी है। इसलिए सभी को अपने आसपास की खाली जगह पर पेड़ जरूर लगाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *