0 भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर 2 हजार की वर्मी बेड को गुजरात की कंपनी से 16500 रुपया में खरीदा गया? ये बड़ा घोटाला है
रायपुर। भाजपा सरकार में गुजरात की कम्पनी से 8 गुना ज्यादा दाम में हुई वर्मी बेड खरीदी की जांच की मांग करते हुऐ प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा उद्यानिकी विभाग में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। सरकारी खजाने को लूटा जा रहा है जेम पोर्टल में जो वर्मी बेड 2000 रु. प्रति नगद की दर पर उपलब्ध है उसे प्रदेश में 16500 रु. प्रति नगद की दर से खरीदी की गई।क्या यही गुजरात मॉडल है।महासमुंद जिला में 16500 रु. की दर से 100 बेड के लिए 165000 रु. की खरीदी की गई। प्रदेश के 14 जिलों में भी इसी प्रकार से खरीदी हुई है। जबकि जेम पोर्टल में 2000 रु. प्रति नगद की दर से उपलब्ध है। एक मुश्त 100 नगद की खरीदी पर 1700 रु. प्रति नग का ऑफर है, फिर 8 गुना ज्यादा दर पर खरीदी भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार का सबूत है, इसकी जांच होनी चाहिये। कम्पनी से पैसा की रिकवरी होनी चाहिए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार में जेम पोर्टल भ्रष्टाचार का पोर्टल बन गया लगातार इसमें खरीदी में मनमानी गड़बड़ियां की शिकायत आ रही।भाजपा सरकार जो भ्रष्टाचार में ज़ीरो टॉलरेंस की बात करती है वह खुद भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है भ्रष्टाचार में शामिल है इसलिए जेम पोर्टल में हो रही गड़बड़ियों की जांच नही की जा रही है और सरकारी पैसे का दोहन किया जा रहा है वर्मी बेड खरीदी हुई में हुई आर्थिक गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि वर्मीबेड की बेड से केंचुए की मदद से जैविक खाद बनाती है। सरकार किसानों को जैविक खेती बढ़ाने के लिए इसे देती है। किसान सरकारी जेम पोर्टल उससे खरीदते हैं। ये बड़ा घोटाला हुआ है ये सिर्फ महासमुंद जिले तक सीमित नहीं है, छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भ्रष्टाचार का ये खेल जारी है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि किसानों को वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाने केंद्र सरकार से फंड भी मिला था। वित्तीय वर्ष खत्म होने से ठीक पहले जल्दबाजी में यह खरीदी की गई और सरकारी पैसे का दुरुपयोग हुआ। भाजपा सरकार के संरक्षण में सप्लायरो साठगांठ कर सरकारी पैसा हड़प लिया। वर्मीबेड जिस एआर इंटरप्राइजेस फर्म ने सप्लाई की उसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचन के लिए है, जबकि वर्मीबेड का कारोबार उसमें दर्ज ही नहीं है.इस कम्पनी पर पहले भी पर वित्तीय अनियमितताओं के गम्भीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।