0 हिंगलाज माता मंदिर बेड़ागांव में रखा जाएगा यह पवित्र जल
0 सिंधी समाज के संत युधिष्ठिर लाल 25 मार्च लेकर आएंगे जल
जगदलपुर। अखंड भारत के गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए माता हिंगलाज भवानी का बलूचिस्तान पाकिस्तान में स्थित मंदिर के पर्वत की गुफा और हिंगोल नदी का पवित्र जल बस्तर लाया जा रहा है। यह जल सिंधी समाज के प्रमुख संत युधिष्ठिर लाल लेकर आ रहे हैं। इस पवित्र जल से बस्तर के बेड़ागांव स्थित माता हिंगलाजिन देवी का अभिषेक किया जाएगा और जल की कुछ मात्रा मंदिर में ही संरक्षित रखी जाएगी।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान की पहाड़ी की पवित्र गुफा में माता हिंगलाज देवी विराजमान हैं। इस पहाड़ी से हिंगोल नदी बहती है। माता भवानी हिंगलाज देवी, पवित्र गुफा और पवित्र नदी को न हिंदू तो पूजते ही हैं, मुसलमान भी नानी मां के नाम से उनकी पूजा करते हैं। इस हिंगोल पर्वत के पवित्र गुफा से निवासरत माता हिंगलाज भवानी के मूल मंदिर पाकिस्तान से पवित्र जल बस्तर के प्राचीन हिंगलाजिन मंदिर बेड़ागांव सोनपुर पंचायत में आ रहा है। ज्ञातव्य हो की शदाणी दरबार रायपुर में सिंध क्षेत्र के रहने वाले अनेक अन्य अनुयायी हिंगलाज माता के भक्त हैं। रायपुर स्थित शदानी दरबार सिंधियों का एक पवित्र धार्मिक स्थल है जिसके पीठाधीश्वर के रूप में नवम ज्योति संत श्री युधिष्ठिर लाल महाराज विराजित हैं। इनकी गणना भारत एवं विदेशों में सिंधी समाज के प्रमुख संत के रूप में होती है। संत युधिष्ठिर लाल के नेतृत्व में हर वर्ष हिंगलाज माता के दर्शन हेतु भारतीय जत्थे पाकिस्तान की यात्रा करते हैं। अजय सिंह बैस के आमंत्रण पर उसी मूल पाकिस्तान में स्थित माता की पवित्र गुफा और हिंगोल नदी का जल लेकर स्वयं संत श्री युधिष्ठिर लाल बस्तर पधारेंगे। वे यह जल पुजारियों एवं बैंस परिवार को प्रदान करेंगें। इस जल से बेड़ागांव स्थित हिंगलाजिन माता का अभिषेक किया जाएगा और शेष जल को संरक्षित रखा जाएगा। संतजी युधिष्ठिर लाल के आगमन पर उनका भव्य स्वागत ग्राम बस्तर में सर्व समाज एवं सिंधी समाज द्वारा किया जाएगा। इसके बाद वे बेड़ागांव मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। इस मंदिर के 300 साल के इतिहास में यह प्रथम ऐतिहासिक अवसर होगा जब मूल हिंगलाजिन शक्तिपीठ से पवित्र जल बस्तर आएगा।
आज मां शारदा मंदिर का लोकार्पण
हिंगलाजिन मंदिर के अध्यक्ष एवं संरक्षक अजय सिंह बैस ने बताया चूंकि हिंगलाज माता का 300 वर्ष प्राचीन मंदिर बेड़ागांव में स्थित है। यह बस्तरवासियों सहित सिंधी, खत्री, गुजराती राजस्थानी लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मूल मंदिर की करीब 300 से अधिक शाखाएं बस्तर एवं उड़ीसा में फैली हुई हैं तथा रियासत काल से ही हिंगलाजिन माता मंदिर बैस मालगुजार परिवार की आराध्या एवं राज परिवार के संरक्षण में रहा है। प्रत्येक वर्ष बस्तर दशहरा एवं विभिन्न उत्सवों में परंपरागत रूप से सम्मिलित होता रहा है। इस मंदिर में इस वर्ष मां भगवती शारदा भवानी मैहर वाली की भी प्रतिष्ठा हो रही है। शारदा भवानी की जलाधिवास अन्नाधिवास, पुष्पाधिवास, फलाधिवास, शैय्याधिवास आदि रस्में पूरी हो चुकी हैं। 25 मार्च को माता शारदा भवानी के मंदिर का संत युधिष्ठिर लाल जी लोकार्पण भी करेंगे। इससे जनमानस में इस मंदिर के प्रति आस्था और प्रबल तथा भव्यता में वृद्धि होगी। मां भगवती शारदा की सफेद संगमरमर से निर्मित महासरस्वती की इस प्रतिमा अपने माता स्व उर्मिला रानी सिंह की स्मृति में अजय सिंह बैस द्वारा भेंट की गई तथा सतेंद्र सिंह बैंस द्वारा सागौन से निर्मित झूला, सिंहासन एवं पलंग भी समर्पित किए जाएंगे।मंदिर के प्रति आस्था रखते हुए कोंडागांव निवासी प्रतिभा सिंह द्वारा दो विशाल सिंह की प्रतिमाएं एवं नगरी निवासी प्रभा राठौर द्वारा मंदिर द्वार रक्षक भेंट किया गया है। मंदिर के दर्शन उपरांत संत युधिष्ठिर लाल जी जगदलपुर में महाराजा प्रवीर चंद्र भजदेव जी के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि भी अर्पित कर राजपरिवार से सौजन्य भेंट राजमहल में करेंगे। इसके बाद वे सिंधी समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। नवरात्रि महोत्सव एवं प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर हिंगलाजिन माता मंदिर में वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, पूर्व विधायक लच्छूराम कश्यप, प्रदेश युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा आदि दर्शन कर चुके हैं। विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं का निरंतर आवागमन बना हुआ है। मंदिर की ओर से बैद पुजारी परिवार अर्जुन बैद, चैन बेद, चंद्रसेना दीवान, लखन कश्यप, टिंकू सेठिया, हेमसागर, डोलाहा पुजारी, मांझी चालकी, सेवादार कार्यरत हैं।