अपमान और असुरक्षा का जहर पी रहे हैं संविदा शिक्षक

0 सालों से सेवा, फिर भी असुरक्षा की भावना 

0 संविदा शिक्षकों ने सुनाया प्रशासन को दर्द 

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ द्वारा बस्तर जिला पदाधिकारियों कलेक्टर आकाश छिकारा और जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन संघ के बस्तर जिला अध्यक्ष प्रवीण अरडे के नेतृत्व में तथा प्रदेश उपाध्यक्ष हिमांगिनी पांडे के मार्गदर्शन में सौंपागया।
इस दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी राहुल कुमार पांडेय, सहित सरिता धर, अंजलि उपाध्याय, स्पंदन पाराशर एवं अन्य पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। ज्ञापन के माध्यम से संविदा शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वर्षों पुरानी पीड़ा, असुरक्षा और उपेक्षा को प्रशासन के समक्ष गंभीरता से रखा गया है। संघ ने बताया कि विगत कई वर्षों से कार्यरत संविदा शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें न तो समान वेतन मिल पा रहा है, न ही समय पर भुगतान, और न ही उनके भविष्य की कोई ठोस सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। महंगाई के इस दौर में अल्प वेतन में परिवार का पालन-पोषण करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है।बस्तर जिला अध्यक्ष प्रवीण अरडे ने कहा कि संविदा शिक्षक आज भी अस्थिरता और असमानता के बीच अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। हम बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं, लेकिन हमारा स्वयं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। यदि हमारी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो हमें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। प्रदेश उपाध्यक्ष हिमांगिनी पांडे ने अपने वक्तव्य में कहा कि “संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके साथ हो रहा भेदभाव न केवल अन्याय है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालता है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए नियमितीकरण एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर त्वरित निर्णय लेना चाहिए। प्रदेश मीडिया प्रभारी राहुल कुमार पांडेय ने कहा कि आज संविदा शिक्षक सम्मान और अधिकार दोनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। समान कार्य के बावजूद समान वेतन और सुविधाएं न मिलना एक गंभीर विसंगति है। यह केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए बड़ा प्रश्न है। प्रशासन को चाहिए कि इन मांगों को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द ठोस समाधान निकाले।

ये हैं शिक्षकों की मांगें
ज्ञापन में प्रमुख रूप से नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि, समयबद्ध वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, स्थानांतरण नीति, सेवा नियमावली लागू करने सहित 12 महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन की दिशा में कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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