विधानसभा में अवैध प्लॉटिंग पर हंगामा, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में धमतरी और कांकेर जिलों में अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठते ही सदन में तीखी बहस छिड़ गई। सत्ता पक्ष की ओर से मिले जवाब को असंतोषजनक बताते हुए विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रश्नकाल की शुरुआत में ही विधायक अंबिका मरकाम ने धमतरी और कांकेर में अवैध प्लॉटिंग के मामलों को उठाते हुए सरकार से कार्रवाई का ब्योरा मांगा। उन्होंने कहा कि इन मामलों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन उन पर क्या ठोस कार्रवाई हुई है, यह स्पष्ट नहीं है।

जवाब में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया कि धमतरी जिले में अवैध प्लॉटिंग से संबंधित 3 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिन पर नगर निगम द्वारा जांच कर कार्रवाई की गई है। वहीं उत्तर बस्तर कांकेर जिले में 5 शिकायतें सामने आईं, जिनमें कई लोगों पर कार्रवाई की गई है। मंत्री ने कहा कि कुछ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं, कुछ के भुगतान रोके गए हैं और पटवारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
मंत्री ने यह भी बताया कि अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने के लिए पूरे प्रदेश में जिला स्तरीय कमेटियां गठित की जाएंगी, जिनकी अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे और वे मॉनिटरिंग करेंगे।
हालांकि, विधायक अंबिका मरकाम ने सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि कई शिकायतों पर अब तक जांच नहीं हुई है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केवल पटवारियों पर कार्रवाई होगी या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार को घेरते हुए पूछा कि पूरे प्रदेश में अब तक कितनी अवैध कॉलोनियां बनीं, कितनों को नोटिस दिया गया और कितनों पर कार्रवाई हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन पटवारियों पर कार्रवाई की बात कही गई है, उनके खिलाफ कब और क्या कार्रवाई हुई।
मंत्री टंक राम वर्मा ने जवाब में कहा कि 67 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं और 3 पटवारियों को प्रारंभिक रूप से दोषी पाए जाने पर उनका स्थानांतरण किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि तत्काल विस्तृत आंकड़े देना संभव नहीं है और अलग से जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
बहस के दौरान विधायक ओमकार साहू और अजय चंद्राकर ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए अवैध प्लॉटिंग का भौतिक सत्यापन कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि बड़े जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि अवैध प्लॉटिंग रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है और जहां-जहां ऐसी गतिविधियां सामने आई हैं, वहां मार्ग अवरुद्ध कर निर्माण कार्य रोके गए हैं। इस बीच भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए पूछा कि जांच “अमले से कराई जाएगी या जुमले से” और मामले की विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग की। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने जोरदार विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे प्रश्नकाल के दौरान माहौल गरमा गया।

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