० रुपए और दस्तावेज लौटाए स्वामिनी को
बकावंड। आज के समय में यह धारणा बन चुकी है कि “ईमानदारी अब दुर्लभ हो गई है।” इस मिथक को तोड़ दिया है जगदलपुर के कृष्णा यादव ने। कृष्णा ने अपने आचरण से इस सोच को गलत साबित करते हुए मानवता और नैतिकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा।
अविनाश अतुल्य सोसायटी गीदम रोड जगदलपुर में योग प्रशिक्षण देने वाली प्रज्ञा मंडावी के साथ जो घटना घटी है, उसे शायद खुद प्रज्ञा भी जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगी और कृष्णा की ईमानदार छवि हमेशा उनके जेहन में बनी रहेगी। प्रज्ञा मंडावी हाल ही में सोसायटी परिसर के क्लब हाउस में 25 हजार रुपए नकद एवं कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भूल गईं थीं।सोसायटी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत 30 वर्षीय कृष्णा यादव पिता रघुनाथ यादव, उम्र 30 वर्ष, निवासी रेलवे सरगीपाल जूनापारा, जगदलपुर निवासी को जब यह राशि एवं दस्तावेज प्राप्त हुए, तो उनके समक्ष एक अवसर था, किन्तु उन्होंने उस अवसर को लालच नहीं, बल्कि जिम्मेदारी में बदल दिया। उन्होंने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए 25,000 की संपूर्ण राशि एवं सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रूप से प्रज्ञा मंडावी को लौटा दिए।कृष्णा यादव रकम मिलते किसी ने देखा नहीं था। वे चाहते तो पूरी रकम दबा जाते, मगर उनके जमीर ने उन्हे ऐसा करने नहीं दिया।उन्होंने यह सिद्ध किया कि ईमानदारी बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आंतरिक संस्कारों से उत्पन्न होती है। 25 हजार की राशि भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन कृष्णा यादव ने उसके बदले जो अर्जित किया है, वह कहीं अधिक मूल्यवान है। और कृष्णा की वह अनमोल संपत्ति है आत्मसम्मान, विश्वास और समाज में एक सशक्त प्रतिष्ठा। आज जब छोटी-छोटी परिस्थितियों में भी लोग अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेते हैं, ऐसे में कृष्णा यादव का यह कार्य हमें यह स्मरण कराता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके चरित्र से ही निर्धारित होती है।। कृष्णा यादव का यह कार्य अत्यंत सराहनीय, अनुकरणीय एवं प्रेरणादायक है। ऐसे ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तियों को केवल धन्यवाद ही नहीं, बल्कि हृदय से सम्मान दिया जाना चाहिए। कृष्णा यादव को उनकी ईमानदारी एवं उत्कृष्ट आचरण के लिए प्रज्ञा मंडावी और सोसायटी परिवार ने हार्दिक बधाई एवं साधुवाद दिया है। प्रज्ञा ने कहा है कि कृष्णा यादव जैसे व्यक्तित्व ही समाज में यह विश्वास दृढ़ करते हैं कि ईमानदारी आज भी जीवित है और वह कृष्णा यादव जैसे लोगों के माध्यम से निरंतर प्रेरित करती रहती है।