0 बाहर मेडिकल स्टोर्स से खरीदनी पड़ती है दवा
बकावंड। करपावंड ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी भुवनेश्वर कश्यप ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय डिमरापाल जगदलपुर में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।
भुवनेश्वर कश्यप ने कहा है कि बस्तर एक आदिवासी क्षेत्र है। बस्तर संभाग में सात जिले कांकेर नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बस्तर आते हैं।जगदलपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज डिमरापाल मे न तो दवाई मिल पा रही है और न ही कुछ और समझ नहीं आ रहा है मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल खोलने के पीछे आखिर सरकार कि मंशा क्या है? श्री कश्यप ने कहा है कि सबसे पहले अस्पताल जाकर टोकन के लिए लाइन लगानी पड़ती है। जब टोकन पर्ची निकालने जाते हैं तो वहां किसी को बताया नहीं जाता है कि बीपीएल कार्डधारी को पर्ची निशुल्क प्राप्त होती है। इससे अनजान क्षेत्रवासी पर्ची के लिए 10 रुपए का भुगतान करते हैं। फिर जब पर्ची मिलती है तब संबंधित डॉक्टर के पास जाते हैं।डॉक्टर जब पर्ची पर कुछ दवाइयां लिखकर देते हैं। इसके बाद जब ग्राउंड फ्लोर पर अस्पताल के दवा वितरण केंद्र पर्ची को दिखाते हैं और दवाई मांगते हैं तो एक ही बात सुनाई पड़ती है यह दवा यहां नहीं मिलती है। कश्यप ने जब संबंधित अस्पताल के उच्च अधिकारियों को इस बात से अवगत कराया एवं जानने का प्रयास किया कि आखिर क्यों यह दवाई नहीं मिल पाती है तो उनका कहना यह आया कुछ विभाग के दवाई अत्यधिक मूल्य के होते हैं एवं जल्दी एक्सपायर हो जाते हैं। इसी कारण यह दवाई नहीं आती और उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कई सारी दवाइयां सप्लाई नहीं कर रही है। अब सोचने वाली बात यह है कि बस्तर संभाग की जनता के साथ इस तरह का खिलवाड़ सरकार द्वारा किया जा रहा है। यह बहुत ही एक गंभीर बात है । गरीब जनता बड़ी उम्मीदों के साथ इस अस्पताल में पहुंचते हैं परंतु उदास होकर लौटना पड़ता है। ऐसी ही घटना हुई है भुवनेश्वर कश्यप के साथ। भुवनेश्वर कश्यप छोटी सी बच्ची विपाशा कश्यप को चेहरे पर कुछ इन्फेक्शन आने की वजह से इस अस्पताल में ले गया था। वहां के डॉक्टर ने पर्ची पर कुछ दवाइयां लिख कर दी। नीचे दवाई वितरण कक्ष में कहा गया कि कि इस विभाग की दवाई है यहां प्राप्त नहीं दी जाती, बाहर से ले लो। अब सोचिए की इस तरह की महंगी दवाइयां बाहर निजी मेडिकल स्टोर्स से खरीदनी पड़े, तो इतन बड़ा अस्पताल बस्तर अंचल में होने का क्या मतलब है?यह बहुत ही एक गंभीर मामला है सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। अंत में भुवनेश्वर कश्यप ने सरकार से गुजारिश करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र के सुख एवं स्वास्थ्य समृद्धि के लिए सरकार जल्द से जल्द हर रोग की दवा इस अस्पताल में उपलब्ध करवाए ताकि बस्तर जैसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल सके ।