विनोबा शिक्षण उत्सव में बस्तर के शिक्षकों को मिली नई ऊर्जा

० नवाचार अपनाने वाले शिक्षकों का हुआ सम्मान 
जगदलपुर। बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण ज़िले में हमारे शिक्षक वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं। कई बार वे अपने निजी संसाधनों और निजी समय का उपयोग करते हुए बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ाते हैं। ऐसे समर्पित प्रयासों को पहचान और सम्मान मिलना बेहद जरूरी है। इस भव्य शिक्षण उत्सव के माध्यम से शिक्षकों के कार्य को सम्मानित किया जा रहा है, यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है। ये विचार बस्तर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन ने बिनाका हेरिटेज बस्तर में आयोजित नौवें ‘विनोबा शिक्षण उत्सव’ में व्यक्त कुए।
शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार और नेतृत्व को सशक्त करने के उद्देश्य से ज़िला शिक्षा विभाग, एचएसबीसी इंडिया और ओपन लिंक्स फाउंडेशन के सहयोग से शिक्षण उत्सव का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में सीईओ श्री जैन ने सम्मानित होने वाले सभी शिक्षकों और अधिकारियों को बधाई दी, साथ ही उन शिक्षकों को भी शुभकामनाएं दीं जिन्हें इस प्रतिष्ठित शिक्षण उत्सव में भाग लेने के लिए चुना गया था। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक और प्रशासन इस मंच का उपयोग ज्ञान साझा करने, एक-दूसरे से सीखने और ऐसे मॉडल विकसित करने के लिए करें, जिन्हें अन्य जिलों और राज्यों में भी दोहराया जा सके, तो ऐसे आयोजन को शत प्रतिशत सफल कहा जा सकता है। इस अवसर पर जिला मिशन समन्वयक अशोक पांडे, सहायक कलेक्टर बिपिन दुबे, विभिन्न विकासखंडों के शिक्षा अधिकारी, कलस्टर अकादमिक समन्वयक तथा जिले के 60 से अधिक शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान ‘मॉर्निंग असेंबली’ विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन ओपन लिंक्स फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर अजहर शेख ने किया। पैनल में जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल, विकासखंड शिक्षा अधिकारी भारती देवांगन, कलस्टर अकादमिक समन्वयक अमित अवस्थी तथा शिक्षक डोमेंद्र गंगबेर शामिल रहे। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने अपने-अपने विद्यालयों के अनुभव साझा करते हुए कई प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए। पैनल चर्चा का सार यह रहा कि प्रार्थना सभा बच्चों का अपना मंच है, जहां वे कम झिझक के साथ अपनी बात रख सकते हैं। बहुभाषी बस्तर जिले में यदि बच्चों को अपनी मातृभाषा में बोलने और सीखने का अवसर दिया जाए, तो वे अधिक सहज महसूस करते हैं। वक्ताओं ने इस मंच का रचनात्मक उपयोग करते हुए बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। विनोबा शिक्षण उत्सव का उद्देश्य शिक्षकों और प्रशासन के बीच संवाद को बढ़ावा देना, जमीनी अनुभवों को साझा करने का अवसर देना और कक्षा व विद्यालय स्तर पर हो रहे शैक्षणिक प्रयासों को सामने लाना है। शिक्षकों, कलस्टर प्रमुखों और विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम में ऐसा वातावरण बनाया, जहां ग्रामीण स्कूलों से जुड़ी चुनौतियों, उनके संभावित समाधानों और नवाचारी गतिविधियों पर गहन और उत्साहपूर्ण चर्चा हुई। इस दौरान शिक्षकों, केंद्र प्रमुखों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य और शैक्षणिक नवाचारों के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही खेल, कविताएं, मनोरंजक गतिविधियां और सामूहिक भोजन ने पूरे आयोजन को जीवंत और ऊर्जावान बना दिया। कई शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि ‘शिक्षण उत्सव’ लंबे समय बाद ऐसा मंच है, जहाँ उन्हें वास्तव में सम्मानित महसूस हुआ है, और इस आयोजन ने शिक्षकीय पेशे के प्रति उनके विश्वास और गर्व को और मजबूत किया है। आचार्य विनोबा भावे शिक्षक सहायक कार्यक्रम के रूप में संचालित ‘विनोबा’ पहल आज महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश में विस्तारित हो चुकी है। अब तक यह कार्यक्रम 60,245 विद्यालयों तक पहुंच बनाते हुए लगभग 1,96,478 शिक्षकों और 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ पहुंचा चुका है। ओपन लिंक्स फाउंडेशन इस पहल के माध्यम से शिक्षा विभाग के साथ मिलकर तकनीक और व्यवहार विज्ञान के सहारे शिक्षकों को सशक्त बनाने और शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक, प्रणालीगत सुधार लाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

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