बस्तर का हर वृक्ष हर पौधा औषधीय गुणों से भरपूर : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव

0 छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष, जगदलपुर में ‘परंपरागत वैद्य सम्मेलन’ और हर्बल औषधि का प्रदर्शन

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राज्य की परंपरागत चिकित्सा पद्धति को नया आयाम देने और जन-सामान्य को प्राकृतिक उपचारों से लाभान्वित करने के उद्देश्य से आज जगदलपुर के वन विद्यालय स्थित दीक्षांत हॉल में “परंपरागत वैद्य सम्मेलन एवं हर्बल औषधि प्रदर्शनी” का सफल आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर ज़िलों के अनुभवी वैद्य, जड़ी-बूटी विशेषज्ञ और स्थानीय पारंपरिक उपचारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह सम्मेलन पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बस्तर का प्रत्येक कण, हर वृक्ष एवं पौधा औषधीय गुणों से भरा हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बस्तर देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट औषधीय पहचान रखता है, जिसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। यह विरासत केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अमूल्य है। उन्होंने इस दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस क्षेत्र में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे बस्तर की इस अनमोल पहचान को और बल मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान श्री देव ने आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति अपना विश्वास व्यक्त करते हुए आयुर्वेद इलाज के अपने व्यक्तिगत अनुभव भी श्रोताओं के साथ साझा किए। उनके अनुभव ने पंरपरागत वैधों और जड़ी बूटी उत्पादकों के उत्साह को और बढ़ाया।

मुख्य आकर्षण: दुर्लभ औषधियाँ और वैज्ञानिक चर्चा
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित अनेक दुर्लभ औषधीय पौधे, जड़ी-बूटियाँ और सदियों पुरानी पारंपरिक उपचार विधियाँ रहीं। प्रदर्शनी में हर्बल चिकित्सा के वैज्ञानिक लाभों पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने वन संपदा संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में पारंपरिक ज्ञान के योगदान पर भी विस्तृत प्रकाश डाला।
आयोजकों ने इस पहल को “परंपरागत ज्ञान का संरक्षण और नई पीढ़ी को प्राकृतिक उपचार से जोड़ने का प्रयास” बताया। सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने आम लोगों को निःशुल्क परामर्श दिया और औषधियों का परिचय कराकर स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा दिया।

इस अवसर पर, मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार तिवारी, वनमंडलाधिकारी बस्तर उत्तम कुमार गुप्ता, वनमंडलाधिकारी सामाजिक वानिकी शमा फ़ारूक़ी, यूनानी चिकित्सा अधिकारी आयुष विभाग डॉ. बी. प्रकाश मूर्ति तथा उप वनमंडलाधिकारी गण देवलाल दुग्गा, योगेश कुमार रात्रे, इंद्र प्रसाद बंजारे, उप प्रबंध संचालक  गुलशन कुमार साहू समेत वन विभाग एवं आयुष विभाग के अनेक अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने इस महत्वपूर्ण पहल की सराहना की। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को रेखांकित करता है, जो भविष्य में हर्बल चिकित्सा और वन संरक्षण के लिए नई राहें खोलेगा।

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