0 सड़कों के किनारे और गोठानों में अवैध रेत के पहाड़, अंतर्राज्यीय रेत तस्करी जोरों पर
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में अवैध रेत की काली कमाई पर्यावरण और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। सामान्य तौर पर 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत उत्खनन में पूर्ण प्रतिबंध रहता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में रेत माफिया मानसून (बारिश) के दौरान भी नदी से खनन कर रहे हैं, नदियों में पनडुब्बी मशीने लगाकर रेत निकाला जा रहा है, रोक लगने से पहले भी भारी मात्रा में अवैध रेत निकालकर खेतों, गांवों और नदी के कैचमेंट एरिया के पास, सड़कों के किनारे और गोठानों की सरकारी जमीनों में बड़े-बड़े पहाड़ जैसे अवैध भंडारण (स्टॉक) खड़े कर दिए गए हैं ताकि बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। हालिया मामले रायपुर जिले के समोदा, कुरुद और करमंदी इलाकों में महानदी को बुरी तरह काटकर रेत के ऊंचे पहाड़ बना दिए गए हैं। बिलासपुर में अरपा और शिवनाथ नदी के पास, जशपुर की शंख नदी और बलौदाबाजार में भी बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण पकड़ा गया है। दुर्ग में शिवनाथ, बिलासपुर में अरपा, मनियारी, गरियाबंद में पैरी और बस्तर में शबरी, शंखनी, डंकनी, नारंगी और इंद्रावती में भी यही हाल है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत के अवैध करोबारियों को भाजपा सरकार का संरक्षण है, इन्हीं की मिलीभगत से छत्तीसगढ़ से अवैध रेत सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर खपाएं जा रहे हैं। झारखंड की अंतर्राज्यीय सीमा, यूपी, उड़ीसा, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र तक रेत तस्कर सक्रिय हैं। ये तस्कर गिरोह संगठित रुप से नदी का सीना छलनी कर रेत का खनन कर रहे है। अवैध उत्खनन से लेकर उसके भंडारण और परिवहन तक को रोकने में यह सरकार नाकाम है। रेत माफियाओं का साम्राज्य फैलता जा रहा है, इनका खौफ इतना ज्यादा है कि इसके विरोध का साहस पंचायत प्रतिनिधित तक नहीं जुटा पा रहे हैं, राजनीतिक संरक्षण, मुनाफे में हिस्सेदारी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ही रेत तस्कर बेलगाम हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत का अवैध कारोबार अब गैंगवार, चाकूबाजी, गोलीबारी के खूनी खेल तक पहुंच गया है। रेत की काली कमाई में एकाधिकार के लिए ही विगत दिनों कोरिया जिले के एक भाजपा नेता के दूसरे भाजपा नेता और उनके साथियों को फॉर्चूनर गाड़ी में बंद करके जिंदा जला दिया। उससे पहले जांजगीर चांपा के जैजेपुर में घर घर में घुसकर दो भाइयों को गोली मार दी गई। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि खनिज विभाग के अधिकारीयों, पुलिस और प्रशासन को भी खुले तौर पर चुनौती दे रहे हैं। बलरामपुर में रेत माफियाओं ने पुलिस कांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचल कर मार दिया। गरीयाबंद और बलौदाबाजार में खनिज इंस्पेक्टर और माइनिंग अधिकारियों को पीटा गया, बस्तर से हो रहे रेत के अंतर्राज्यीय तस्करी पर खबर चलाने वाले चार पत्रकारों के गाड़ी में गांजा रखवाकर झूठे केस में फंसा दिया गया। कहीं किसी की हत्या हो रही है तो कहीं इनके गुर्गे खुलेआम धमका रहे हैं, बिना सत्ता के प्रश्रय के यह संभव नहीं है।