० कृषि विभाग की कार्यशैली पर सवाल
कोंडागांव। नगर और जिले में खाद की जमकर कालाबाजारी की जा रही है। शिकायतों पर कृषि विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे कालाबाजारियों के हौसले बुलंद हैं और किसान परेशान हैं। कोंडागांव में रासायनिक खाद की कथित कालाबाजारी और अधिक कीमत पर यूरिया बेचे जाने की शिकायत को लेकर भारतीय किसान संघ यूनियन कोंडागांव के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान कृषि विभाग कार्यालय पहुंचे। किसानों ने कृषि केंद्रों में यूरिया निर्धारित कीमत से अधिक 750 रुपये में बेचे जाने की शिकायत उप संचालक कृषि कैलाश मरकाम के समक्ष रखी। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष घनश्याम नेताम, सचिव पूनम राम मरकाम सहित किसान प्रतिनिधियों ने संबंधित कृषि केंद्र संचालकों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की। किसानों का कहना था कि वे खाद की कालाबाजारी की शिकायत लेकर विभाग के पास पहुंचे हैं। ऐसे में विभाग को मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

किसानों के अनुसार, शिकायत सुनने के दौरान विभागीय अधिकारियों ने उनसे सवाल किया कि वे जिला सहकारी समिति मर्यादित लैम्पस से खाद क्यों नहीं खरीदते। इस पर किसानों ने कहा कि उनकी शिकायत खाद की कथित कालाबाजारी और अधिक कीमत पर बिक्री को लेकर है। उन्होंने विभाग से पूछा कि क्या संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसानों का आरोप है कि उप संचालक कृषि कैलाश मरकाम ने खाद की खरीदी की रसीद प्रस्तुत करने को कहा और रसीद मिलने के बाद ही कार्रवाई की बात कही। इससे किसान नाराज हो गए। किसानों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
किसानों ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खाद की कथित कालाबाजारी पर तत्काल जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो भारतीय किसान संघ आंदोलन करेगा। किसानों ने शासन, प्रशासन एवं जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उप संचालक को हटाने की मांग
किसानों ने उप संचालक कृषि कैलाश मरकाम पर किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए उन्हें वर्तमान पद से हटाकर मूल स्थान पर पदस्थ करने की मांग की है। साथ ही उनके स्थान पर नए उप संचालक कृषि की पदस्थापना की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि खाद की उपलब्धता और कीमत को लेकर किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए कृषि केंद्रों की नियमित जांच तथा कालाबाजारी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
अब किसानों को भेजोगे जेल
उल्लेखनीय है कि पूर्व में खाद की कालाबाजारी की खबर प्रकाशित करने पर एक पत्रकार को बदनाम कर स्थानीय नगर पालिका के एक नेता ने उन्हें जेल भी भिजवाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब जबकि जिले के किसान और किसान संघ के पदाधिकारी जब खुद खाद की कालाबाजारी की शिकायत कर रहे हैं, तब क्या उक्त नेता इन सारे किसानों और किसान नेताओं को भी जेल भिजवाएंगे? क्या ऐसा माद्दा उक्त नेता में है? खाद विक्रेता नेता के संदिग्ध कार्यों की भी जांच होनी चाहिए। लोग अब उक्त नेता पर भी सवाल उठा रहे हैं।