काठ मार गया है बस्तर के खाद्य विभाग को?

0  पीडीएस के चावल की अफरा तफरी का केस 
0 बोरों में स्टेक नंबर रहने के बाद भी विभाग पता लगाने में नाकाम 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। बस्तर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन की अफरा तफरी आम बात हो गई है। खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से गरीबों के हिस्से के चावल, गुड़, चना आदि की जमकर कालाबाजारी की जा रही है, मगर लगता है खाद्य विभाग को काठ मार गया है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि चावल की हेराफेरी का बड़ा मामला पकड़े जाने के बाद भी विभाग अब तक तह तक नहीं पहुंच पाया है। चावल के बोरों पर स्टेक नंबर अंकित रहने के बावजूद विभाग के अधिकारी संबंधित पीडीएस दुकानों का पता नहीं लगा पाए हैं या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। काजल की कोठरी सभी का दामन जो काला हो चुका है।
करीब माह भर पहले ट्रक और पिकअप पकड़े गए थे। इन दोनों वाहनों से 378 बोरा चावल बरामद किया गया था। इस चावल में 88 बोरे पीडीएस के थे। लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी विभाग यह पता नहीं लगा सका है कि चावल की कालाबाजारी किस सरकारी राशन दुकान से की गई थी। जबकि चावल के बोरों पर स्टेक नंबर भी अंकित था।नंबर के आधार पर पता लगाया जा सकता है चावल किस दुकान से निकला था। विभाग चावल की कालाबाजारी करने वाले दुकानदार तक पहुंचने में नाकाम रहा है। जबकि नागरिक आपूर्ति निगम से मिली जानकारी के अनुसार टैग लगा चावल की सप्लाई शहर की सरकारी राशन दुकानों में की जाती है। शहर की राशन दुकानों में फर्जी अंगूठा निशानी लगाकर चावल की कालाबाजारी का खेल चल रहा है। इसका कमीशन खाद्य विभाग तक पहुंचाने की खबर है। उक्त मामले में गेंद अब कलेक्टर के पाले में है। ज्ञातव्य हो कि मुखबिर की सूचना पर खाद्य विभाग ने अगस्त के प्रथम सप्ताह में चावल से भरी पिकअप एवं एक ट्रक जप्त किया था। चावल माफिया द्वारा गरीबों का चावल शहर से लगे राईस मिल में बेचने की तैयारी की गई थी। लेकिन विभाग ने गंतव्य पहुंचने से पहले उसे धर दबोचा। विभाग चावल माफिया से यह पता नहीं लगा सका कि चावल किस दुकान से लाया गया था है। खबर है कि शहर के कई राशन दुकान संचालक जो वर्षों से पीडीएस दुकान संचालित कर रहे हैं, उनकी राशन माफिया से साठगांठ है। ये राशन दुकानदार खाद्यान्न वितरण पंजी में फर्जी अंगूठा निशानी लगाकर चावल की कालाबाजारी करने का खेल करते आ रहे हैं । माफिया चावल खरीदी कर चावल को राईस मिलर्स के पास बेच देते हैं और राईस मिलर्स इस चावल की पालिश कर उसे बाजार में खपाते हैं।

ऐसे होती है आपूर्ति
जानकारी के अनुसार चावल के 3 हजार बोरों का एक स्टेक तैयार किया जाता है उस स्टेक से राशन दुकानों तक चावल की सप्लाई की जाती है। नागरिक आपूर्ति निगम के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त स्टेक नंबर का चावल शहर की शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में सप्लाई की गई थी। खाद्य विभाग ने उक्त दुकानों के जांच करनें में रूचि नहीं दिखाई है। खबर है कि जिले के अफसर को गुमराह करते हुए अन्य विकासखंडों में चावल सप्लाई की जानकारी दी गई है। जबकि जप्त गरीबों का चावल शहर के सरकारी राशन दुकानों में भेजा गया था। लेकिन विभाग उन दुकानों के नामों के खुलासा करने से आश्चर्य जनक ढंग से बचता नजर आ रहा है।

गेंद कलेक्टर के पाले में
खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। उनके अधीनस्थ कर्मचारियों का कहना है कि उक्त मामले से कलेक्टर को अवगत करा दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई कलेक्टर के पाले में है। जांच के लिए भी कलेक्टर के आदेश का इंतजार है। जप्त चावल के संबंध में कार्रवाई को लेकर जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम राठौर किसी भी तरह की जानकारी देने से बच रहे हैं। वे फोन भी रिसीव नहीं करते।