0 ग्राम पंचायत ने वन विभाग की आपत्ति को किया नजरअंदाज
0 सरकारी धन से सरकारी संपत्ति को पहुंचा रहे हैं नुकसान
(अर्जुन झा) बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चोकनार में सरकारी धन से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां ग्राम पंचायत द्वारा वन भूमि पर सेग्रीगेशन शेड निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर पंचायत द्वारा सेग्रीगेशन शेड का निर्माण कराया जा रहा है, वह वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और निर्माण से पहले वन विभाग की आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।
ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा निर्माण कार्य की शुरुआत से ही पंचायत को आपत्ति जताते हुए काम रोकने की बात कही जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद सरपंच और सचिव द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव और सरपंच को वन विभाग की आपत्ति की जानकारी होने के बावजूद कथित तौर पर निर्माण कार्य नहीं रोका गया। पंचायत स्तर पर बरती गई इस कथित लापरवाही और मनमानी का नतीजा अब यह है कि सरकारी राशि से लाखों रुपये खर्च कर सेग्रीगेशन शेड का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन यदि निर्माण स्थल नियमों के विपरीत पाया जाता है तो पूरी राशि के उपयोग पर सवाल खड़ा होना तय है।

वन विभाग की आपत्ति बेअसर
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य शुरू होने के समय ही वन विभाग के कर्मचारियों ने पंचायत को मौखिक रूप से आपत्ति दर्ज कराते हुए जंगल क्षेत्र में निर्माण नहीं करने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद पंचायत द्वारा निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब संबंधित विभाग ने पहले ही आपत्ति जता दी थी तो पंचायत ने लिखित अनुमति और स्थल की वैधानिक स्थिति स्पष्ट किए बिना निर्माण शुरू कैसे कर दिया, यह जांच का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्य में स्थल चयन से लेकर विभागीय अनुमति और तकनीकी स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। यदि निर्माण स्थल वास्तव में वन विभाग के अधीन क्षेत्र में आता है और वहां निर्माण के लिए अनुमति आवश्यक थी, तो बिना अनुमति काम शुरू करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लाखों खर्च, अब जांच की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में लाखों की सरकारी राशि खर्च की जा रही है। यदि जांच में निर्माण स्थल नियमों के विपरीत पाया जाता है तो सवाल यह भी उठेगा कि बिना आवश्यक अनुमति के काम शुरू करने की अनुमति किसने दी और सरकारी राशि की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा पंचायत पदाधिकारी की होगी? ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल निर्माण कार्य की जांच ही नहीं, बल्कि स्वीकृति से लेकर राशि आहरण, स्थल चयन, तकनीकी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पंचायत ने वन विभाग से कोई लिखित अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया था या नहीं।
अधिकारी भी शक के घेरे में
मामले को लेकर जनपद पंचायत बकावंड के सीईओ पारेश्वर क्रूरे से चर्चा की गई। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है। मगर बिना स्थल निरीक्षण किए निर्माण की अनुमति ग्राम पंचायत को जनपद पंचायत के अधिकारियों ने कैसे दे दी? यह भी जांच का विषय है। अब देखना होगा कि जांच में निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और वन विभाग की आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखने के मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है।ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और यदि नियमों की अनदेखी प्रमाणित होती है तो संबंधित पंचायत पदाधिकारियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी राशि के दुरुपयोग या अनियमितता की पुष्टि होने पर राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जाए। अब सवाल यह है कि जब वन विभाग की ओर से निर्माण को लेकर शुरुआत से ही आपत्ति जताई जा रही थी, तो पंचायत ने आखिर किसके भरोसे निर्माण कार्य जारी रखा? क्या निर्माण से पहले सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं? और यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो सरकारी राशि से निर्माण शुरू कराने की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
कराएंगे मामले की जांच
चोकनार में चल रहे सेग्रीगेशन शेड निर्माण विवाद की जांच कराएंगे। अगर निर्माण वन विभाग की जमीन पर होना पाया गया तो अब तक खर्च की जा चुकी राशि की वसूली भी करेंगे।
-परेश्वर कुर्रे,
सीईओ जनपद पंचायत बकावंड