रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रश्नकाल के दौरान उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद वितरण के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए सरकार पर विरोधाभासी जानकारी देने का आरोप लगाया। वहीं, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सदन में प्रस्तुत आंकड़े पूरी तरह तथ्यात्मक और प्रमाणिक हैं।
प्रश्नकाल के दौरान दलेश्वर साहू ने कहा कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कहीं सहकारी समितियों के माध्यम से 48 प्रतिशत और निजी क्षेत्र के माध्यम से 52 प्रतिशत उर्वरक वितरण की जानकारी दी गई है, जबकि विभागीय जवाब में अलग आंकड़े दर्ज हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि सही आंकड़े कौन से हैं।
इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विभाग की ओर से तीन पृष्ठों का विस्तृत जवाब सदन में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति में राज्य के कुल उर्वरक भंडारण का लगभग 64 प्रतिशत सहकारी क्षेत्र और 36 प्रतिशत निजी क्षेत्र के पास उपलब्ध है। मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से कोई विरोधाभासी जानकारी नहीं दी गई है।
इसके बाद दलेश्वर साहू ने आरोप लगाया कि कुछ जिलों में निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक उर्वरक का वितरण किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता सीमित है, वहां अपेक्षा से अधिक खाद भेजी गई है, जिससे वितरण व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उर्वरक कंपनियों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों का वितरण केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में परिवहन संबंधी कठिनाइयों को देखते हुए अग्रिम रूप से अधिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।
मंत्री ने यह भी बताया कि उर्वरकों का राज्यवार आवंटन भारत सरकार द्वारा किया जाता है। राज्य सरकार को जितनी मात्रा आवंटित होती है, उसका जिलों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार वितरण किया जाता है। इसलिए उर्वरक कंपनियों से सीधे आवंटन कराने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।
कांग्रेस विधायक ने जिन क्षेत्रों में अधिक वितरण हुआ है, वहां जांच कराने की मांग दोहराई। हालांकि कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जांच की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वितरण पूरी तरह मांग, उपलब्धता और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप किया गया है।
उर्वरक वितरण के मुद्दे पर हुई इस बहस के दौरान सदन में कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार ने दोहराया कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।