रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में नवा रायपुर स्थित सेवाग्राम परियोजना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने परियोजना पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए इसे “एक व्यक्ति विशेष की स्वेच्छाचारिता” का परिणाम बताया। उनकी इस टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी आपत्ति जताई, जिससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया।
प्रश्नकाल के दौरान सेवाग्राम परियोजना की वित्तीय और भौतिक प्रगति से जुड़े सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर में सेवाग्राम विकसित करने का निर्णय 10 मार्च 2022 को लिया गया था। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर ग्राम के विचार को बढ़ावा देना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण एवं गतिविधियों का केंद्र विकसित करना है।
मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक परियोजना के लिए 129 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। उन्होंने बताया कि मल्टीपरपज डाइनिंग हॉल, सामुदायिक किचन और प्रसाधन कक्ष के निर्माण पर 3.72 करोड़ रुपये, जबकि अन्य निर्माण कार्यों पर 104.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार के अनुसार परियोजना के निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं, हालांकि इसके संचालन के लिए अभी अलग से कोई प्रशासनिक ढांचा स्वीकृत नहीं किया गया है।
मंत्री के जवाब के बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने परियोजना पर हुए खर्च पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 200 करोड़ रुपये एक व्यक्ति विशेष की स्वेच्छाचारिता के कारण खर्च किए गए। इस टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तत्काल खड़े हो गए और उन्होंने इस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कुछ समय तक तीखी बहस और नोकझोंक होती रही।
बाद में अजय चंद्राकर ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से भूपेश बघेल की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
सेवाग्राम परियोजना को लेकर हुई इस बहस के दौरान सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले, हालांकि अंत में चर्चा मंत्री के जवाब और विधायक की सफाई के साथ आगे बढ़ी।