रायपुर। महिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा कि नकटी गांव में 85 आवास एवं प्रधानमंत्री आवास के मकानों की तोड़-फोड़ साय सरकार और भाजपा के गरीब विरोधी चेहरे को उजागर करता है। भाजपा सरकार बताये कि क्या गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाना ही उसका ‘सुशासन’ है? जिन लोगों के सिर पर छत थी, उन्हें बारिश के बीच बेघर करना किस कानून और किस मानवता का हिस्सा है? अगर यही विकास है, तो यह विकास नहीं बल्कि गरीबों के साथ अन्याय है।” प्रभावित परिवारों को पहले पुनर्वास क्यों नहीं दिया गया? उनके सामान को सुरक्षित हटाने का समय क्यों नहीं दिया गया? और बारिश के मौसम में ही इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?” पुनर्वास के नाम पर प्रभावित परिवारों को धोखा दिया जा रहा है मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई हैं।
महिला कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा कि सरकार उद्योगपतियों को सस्ती जमीन दे सकती है, लेकिन गरीबों को सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दे सकती। क्या इस सरकार में गरीब की कोई कीमत नहीं रह गई है?” यदि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी थी, तो पुनर्वास पहले और बुलडोजर बाद में क्यों नहीं हुआ? मानसून के दौरान विस्थापन की जल्दबाजी क्यों की गई? जिन परिवारों के मकान तोड़े गए, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या सरकार यह गारंटी देगी कि किसी भी प्रभावित परिवार से नए मकान के नाम पर कोई राशि नहीं ली जाएगी? यदि विधायक कॉलोनी बनानी थी, तो सरकारी खाली जमीन का उपयोग क्यों नहीं किया गया? जिन अधिकारियों ने कार्रवाई की, उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी?
महिला कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा कि 1 कमरे के घर में 20 से 25 सदस्यीय परिवार को व्यवस्थापन दिया गया है। उनका गुजारा कैसे होगा? वहां पर बिजली, पानी जैसी मूलभूत जरूरते भी नहीं है। सरकार ने प्रभावितों को जो अस्थायी आवंटन पत्र दिया है उसके अनुसार 5.50 लाख, 8.50 लाख दो श्रेणी के मकान दिया है। इसका राशि का भुगतान कौन करेगा? इसको पूरा निःशुल्क क्यों नहीं किया गया? सरकार के पास नये रायपुर में हजारों एकड़ खाली जमीने है। सरकार विभिन्न संस्थाओं कंपनियों को मुफ्त में 1 रू. फिट में जमीने देती है। वहां पर विधायक कॉलोनी क्यों नहीं बनाते है?
महिला कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा कि “कांग्रेस किसी विकास का विरोध नहीं करती, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता जो गरीबों के आंसुओं, आदिवासियों के अधिकारों और संवैधानिक प्रक्रियाओं को कुचलकर किया जाए। हमारी मांग स्पष्ट है- सम्मानजनक पुनर्वास, उचित मुआवजा, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सरकार की नैतिक जवाबदेही।”