० नहीं है सरपंच की कोई भूमिका, फंसाया जा रहा है बेवजह
बकावंड। बस्तर जिले की ग्राम पंचायत करपावंड में जारी भूमि विवाद के मसले पर ग्रामीण सरपंच के समर्थन में सामने आ गए हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि विवाद में सरपंच का कोई रोल नहीं है, उन्हें बेवजह फंसाने और परेशान करने की कोशिश की जा रही है। करपावंड में जमीन संबंधी विवाद और सरकारी अमले पर हमले को लेकर जिला पत्रकार संघ भवन में ग्रामीणों एवं छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित कर अपना पक्ष रखा गया।
पत्रकार वार्ता में बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने दावा किया कि भूमि विवाद के मामले में सरपंच की कोई भूमिका नहीं है और उन्हें जबरन प्रकरण में फंसाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विवादित भूमि के निष्पक्ष सीमांकन और राजस्व अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराना है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने कहा कि करपावंड के भूमि विवाद को एकतरफा प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से राजस्व रिकॉर्ड में कथित त्रुटियों के सुधार तथा विवादित भूमि के निष्पक्ष सीमांकन की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार बंदोबस्त के दौरान तैयार नक्शों और वर्तमान राजस्व अभिलेखों में कई विसंगतियां हैं। इसके चलते भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि पुराने और वर्तमान खसरों के रकबे एवं स्थिति में अंतर दिखाई देता है, जिसके कारण गांव में लगातार विवाद उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने के बावजूद अब तक संपूर्ण विवादित भूमि का निष्पक्ष सीमांकन नहीं कराया गया है। पत्रकार वार्ता में शामिल महिलाओं ने भी प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि गांव में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए विवादित भूमि का सीमांकन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने बताया कि 15 जून को कलेक्टर बस्तर को सौंपे गए ज्ञापन में विवादित भूमि का सीमांकन, राजस्व अभिलेखों की जांच तथा बंदोबस्त के दौरान हुई कथित त्रुटियों के सुधार की मांग की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार जिस भूमि को खाली कराने के लिए राजस्व अमला पहुंचा था, वह खसरा क्रमांक 567/2 की भूमि है, जिसे गांव के लोग पूर्व से शासकीय भूमि बताते आ रहे हैं।
वहीं प्रशासन का पक्ष है कि न्यायालय के आदेश के तहत संबंधित भूमि पर कब्जा दिलाने की कार्रवाई की जा रही थी। घटना के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ मारपीट तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस द्वारा सरपंच सहित कई लोगों पर भीड़ को उकसाने और नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं तथा 12 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।हालांकि पत्रकार वार्ता में मौजूद ग्रामीणों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरपंच का इस पूरे विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उन्हें बेवजह मामले में शामिल किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।ग्रामीणों एवं सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुना जाए तथा विवादित भूमि का पुनः सीमांकन कराया जाए। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं, बल्कि गांव में शांति बनाए रखते हुए भूमि विवाद का स्थायी समाधान निकालना है।