ग्रामीणों पर एफआईआर से माहौल गर्म, लखेश्वर कश्यप ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

0 तीन पीढ़ियों से निवासरत लोगों की जमीन की नाप से बिगड़ गए हालात

बकावंड। अनुभाग बकावंड के करपावंड की शासकीय भूमि की नापजोख के दौरान हुए विवाद के बाद एफआईआर दर्ज किए जाने से मामले पर अब राजनीतिक और सामाजिक रंग चढ़ गया है। आदिवासी युवा संगठन ने इसे लेकर मोर्चा खोल दिया है। संगठन के अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने पीड़ितों से मुलाकात के बाद इसे आदिवासी अस्मिता का मुद्दा बताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
करपावंड में प्रशासन द्वारा सीमांकन कार्रवाई के दौरान हुई धक्का-मुक्की की घटना के बाद 21 ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इसे लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन लगभग 10 एकड़ भूमि की नपाई कर रहा था। इस प्रक्रिया के दौरान ग्रामीण शांतिपूर्वक मौजूद रहे और उन्होंने किसी प्रकार का विरोध नहीं किया। विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब उन भूमि क्षेत्रों की भी नपाई की जाने लगी, जहां करीब 21 परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से मकान बनाकर निवास कर रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका हुई कि सीमांकन के बाद उनके घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें बेदखल किया जा सकता है। इसी भय और तनावपूर्ण स्थिति के बीच कुछ लोगों और अधिकारियों के बीच धक्का-मुक्की की घटना हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने 21 ग्रामीणों के खिलाफ एफआiआर दर्ज कर ली, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए बस्तर आदिवासी युवा संगठन के अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप करपावंड पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित ग्रामीणों को हौसला देते हुए उनकी समस्याएं सुनीं तथा हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
लखेश्वर कश्यप ने कहा कि यदि बस्तर के आदिवासी और वर्षों से बसे ग्रामीण ही अपने अधिकारों और आशियाने को लेकर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो यह सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त संवाद और समाधान के इस प्रकार की कार्रवाई लोगों में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान नहीं किया गया, निर्दोष लोगों पर दर्ज कार्रवाई की समीक्षा नहीं हुई और वर्षों से बसे परिवारों के भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।इधर पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच, एफआईआर की समीक्षा तथा वर्षों से बसे लगभग 21 परिवारों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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