राजस्व न्यायालय से बड़े हो गए हैं नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी?

०  न्यायालय के आदेश की बार बार अवमानना 
दल्ली राजहरा। भले ही पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन की लहर चल रही हो, मगर दल्ली राजहरा शहर में स्थानीय नगर पालिका प्रशासन के कुशासन की आंधी चल रही है। पालिका क्षेत्र में स्थित नजूल और शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे कराने, उन जमीनों को बिकवाने का काला खेल खुलेआम चल रहा है। वहीं न्यायालय के आदेश के बाद भी वादी की जमीन से बेदखली की कार्रवाई नहीं की जा रही है। कार्रवाई करें भी कैसे, अवैध कब्जा जब खुद नगर पालिका के राजस्व विभाग के एक जमीन दलाल तथाकथित बुद्धिमान कर्मचारी ने करवाया हो?
नगर पालिका सीमा क्षेत्र में स्थित जमीनों की बंदरबांट मिलजुलकर की जा रही है राजस्व अमले के बुद्धिमान कर्मचारी ने पालिका की महिला अधिकारी को अपने तीस साल के अनुभवों का रुतबा दिखाकर अपने प्रभाव में ले लिया शुरू है। नगर के प्रायः सभी वार्डो की जमीन को इसके उसके नाम से उलझा कर दोनों पक्षों को ही कब्जा दिलाने का आश्वासन इस बुद्धिमान कर्मचारी द्वारा दिया जाता है। इस तरह वह दोनों पक्षों को आपस में लड़ाकर यह बुद्धिमान कर्मचारी अपना उल्लू सीधा करने में लग जाता है।

मामला जब राजस्व न्यायालय में पहुंचता है और न्यायालय जब वास्तविक हकदार के पक्ष में स्थगन आदेश जारी करता है तो यह बुद्धिमान कर्मचारी और नगर पालिका अधिकारी न्यायालय के आदेश को भी ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आते। वार्ड क्रमांक 22 में पुष्पा प्रसाद पति मनोज प्रसाद के मकान के पीछे की जमीन और आशा टॉकीज के पास की जमीन के मामले में भी इस बुद्धिमान कर्मचारी और नगर पालिका अधिकारी ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। पुष्पा प्रसाद के मकान के पीछे बनी निकास नाली की जमीन पर नगर पालिका के तथाकथित बुद्धिमान कर्मचारी ने लेनदेन कर लक्ष्मी बाई नामक महिला से कब्जा करा दिया। इस मामले में पुष्पा प्रसाद ने पहले तहसीलदार न्यायालय, फिर एसडीएम न्यायालय में याचिका दायर की थी। दोनों न्यायालयों से उक्त जमीन पर अवैध कब्जे और अवैध निर्माण के खिलाफ स्थगन आदेश पारित हुआ।

दोनों न्यायलयों ने अवैध कब्जे और निर्माण पर रोक लगाने के लिए नगर पालिका सीएमओ और राजहरा पुलिस को निर्देशित किया था, मगर रोक तो नहीं लगी लग पाई, अलबत्ता अवैध कब्जे की जमीन पर अवैध पक्का मकान जरूर तैयार हो गया। प्रतिवादी लक्ष्मी बाई को पूरे निर्माण के दौरान नगर पालिका का बुद्धिमान कर्मचारी संरक्षण देता रहा। इस तरह न्यायालयीन आदेश की खुलेआम अवहेलना कर दी गई। इसी तरह आशा टॉकीज की जिस जमीन का एक व्यक्ति द्वारा पार्किंग के लिए दशकों से उपयोग किया जाता रहा है, उस जमीन को एक अन्य व्यक्ति का बताकर नगर पालिका के राजस्व विभाग के कर्मी ने फर्जी रसीदें काट दी। यह मामला भी राजस्व न्यायालय पहुंचा और जमीन का पहले से पार्किंग के रूप में उपयोग करते आ रहे व्यक्ति के पक्ष में न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी किया। नगर पालिका ने इस मामले में भी अदालत की अवमानना कर दी। ऐसा खेल बुद्धिमान कर्मचारी पिछले तीस साल से करता आ रहा है। न्यायालय के आदेश की अवमानना करने पर अब नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात है।